India News: बिहार के नए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी अपने सख्त तेवरों और कार्यशैली के कारण देश भर की सुर्खियों में हैं। वह शासन के मामले में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की राह पर चलते दिख रहे हैं। पहले उन्होंने बिहार में ‘बुलडोजर मॉडल’ को अपनाया और अब सार्वजनिक रूप से मुस्लिम टोपी पहनने से इनकार कर दिया है। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल रहा है। राजनीतिक गलियारों में सम्राट के इस कदम को हिंदुत्व की ओर एक बड़ा और स्पष्ट संदेश माना जा रहा है।
जनता दरबार में टोपी पहनने से किया साफ इनकार
मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद सम्राट चौधरी इन दिनों नियमित रूप से जनता दरबार लगा रहे हैं। इसी दौरान एक कार्यक्रम में मुस्लिम समुदाय का एक प्रतिनिधि उनका स्वागत करने पहुंचा। उस व्यक्ति ने सम्राट चौधरी को पारंपरिक टोपी पहनाने की कोशिश की, लेकिन मुख्यमंत्री ने तुरंत उसे रोक दिया। उन्होंने टोपी पहनने के बजाय उसे हाथ में लेना बेहतर समझा। हालांकि, उन्होंने उसी व्यक्ति द्वारा दिया गया गमछा सहर्ष स्वीकार किया। बाद में उन्होंने वह टोपी अपने पीछे खड़े सुरक्षा गार्ड को थमा दी।
टोपी प्रकरण के पीछे छिपा है बड़ा राजनीतिक संदेश
सम्राट चौधरी के इस व्यवहार को राजनीतिक जानकार बेहद अहम मान रहे हैं। बीजेपी के शीर्ष नेता अक्सर सार्वजनिक मंचों पर मुस्लिम टोपी पहनने से बचते रहे हैं। इसे पार्टी की ‘तुष्टिकरण विरोधी’ राजनीति का हिस्सा माना जाता है। सम्राट चौधरी की राजनीति मुख्य रूप से लव-कुश (कुशवाहा) वोट बैंक और हिंदुत्व के एजेंडे पर टिकी है। इस घटना के जरिए उन्होंने अपने समर्थकों को यह संदेश देने की कोशिश की है कि वह अपनी विचारधारा से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेंगे।
बिहार में योगी मॉडल और एक्शन मोड में मुख्यमंत्री
सम्राट चौधरी केवल प्रतीकों की राजनीति नहीं कर रहे, बल्कि प्रशासनिक स्तर पर भी वह काफी सक्रिय हैं। शपथ लेने के तुरंत बाद उन्होंने सचिवालय पहुंचकर महत्वपूर्ण फाइलों का निपटारा किया। वह योगी आदित्यनाथ की तर्ज पर अपराध के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपना रहे हैं। राज्य में अवैध कब्जों पर बुलडोजर चलना इसकी बड़ी मिसाल है। वह मुख्य सचिव और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ लगातार बैठकें कर रहे हैं। सम्राट का लक्ष्य बिहार की प्रशासनिक व्यवस्था को नई रफ्तार देना है।
नीतीश कुमार ने भी किया था टोपी का विरोध
दिलचस्प बात यह है कि बिहार की राजनीति में यह पहली बार नहीं हुआ है। हाल के दिनों में नीतीश कुमार ने भी इसी तरह के एक कार्यक्रम में मुस्लिम टोपी पहनने से मना किया था। सम्राट चौधरी के इस ताजा रुख ने साफ कर दिया है कि बिहार की एनडीए सरकार अब अपनी नई और आक्रामक छवि के साथ आगे बढ़ेगी। मुख्यमंत्री अब सीधे जनता से जुड़कर उनकी समस्याएं सुन रहे हैं। इससे प्रशासनिक मशीनरी में भी हड़कंप मचा हुआ है और लोग उनके फैसले की सराहना कर रहे हैं।
