महिला आरक्षण लागू: आधी रात को केंद्र का बड़ा धमाका, 2029 में 850 सीटों वाली होगी लोकसभा, जानें पूरा गणित

India News: भारत की राजनीति में आज एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया है। केंद्र सरकार ने आधी रात को नोटिफिकेशन जारी कर देशभर में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे महिलाओं के लिए एक बड़ा तोहफा बताया है। साल 2023 में पारित हुआ ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ आज यानी 17 अप्रैल 2026 से आधिकारिक तौर पर प्रभावी हो गया है। इस कानून के लागू होने के साथ ही संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी का रास्ता साफ हो गया है।

मंत्रालय का नोटिफिकेशन और परिसीमन की शर्त

केंद्रीय कानून मंत्रालय ने संविधान के 106वें संशोधन अधिनियम 2023 को लेकर अधिसूचना जारी कर दी है। हालांकि, इस कानून के लागू होते ही तत्काल प्रभाव से महिलाओं को आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा। जानकारों के मुताबिक, इसके लिए सबसे पहले नई जनगणना कराई जाएगी। इसके बाद संसदीय और विधानसभा क्षेत्रों का नए सिरे से परिसीमन (डिलिमिटेशन) किया जाएगा। परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित की जा सकेंगी।

लोकसभा की तस्वीर बदलेगी, बढ़ेंगी सीटें

महिला आरक्षण कानून के प्रभावी होने से लोकसभा की पूरी संरचना बदलने वाली है। नए प्रावधानों के तहत साल 2029 तक लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करने की योजना है। इनमें से 35 सीटें केंद्र शासित प्रदेशों के लिए आरक्षित होंगी और शेष सीटें अन्य राज्यों के बीच विभाजित की जाएंगी। सीटों की संख्या बढ़ने से भविष्य में केंद्र में सरकार बनाने के लिए किसी भी दल या गठबंधन को 400 से अधिक सीटों के बहुमत की आवश्यकता होगी।

प्रधानमंत्री मोदी ने फैसले को बताया गौरवपूर्ण

संसद के विशेष सत्र में इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच लगभग 15 घंटे तक लंबी बहस चली। सदन में संविधान संशोधन, परिसीमन और केंद्र शासित प्रदेशों से जुड़े तीन महत्वपूर्ण बिल पेश किए गए थे। वोटिंग से पहले ही सरकार ने इसे लागू कर अपनी प्रतिबद्धता जताई है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह देश के इतिहास का सबसे बड़ा और बेहतरीन फैसला है। उन्होंने अफसोस जताया कि यह निर्णय दशकों पहले होना चाहिए था, लेकिन आज इसे लागू कर वे गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं।

नारी शक्ति वंदन अधिनियम का भविष्य

कानून मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, तकनीकी और कानूनी औपचारिकताओं को पूरा करने के लिए ही आज की तारीख तय की गई थी। अब सरकार का अगला लक्ष्य जनगणना और परिसीमन की जटिल प्रक्रिया को समय पर पूरा करना है। विपक्षी दलों ने भी इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी है और वे आरक्षण के कार्यान्वयन की समय सीमा पर पैनी नजर बनाए हुए हैं। कुल मिलाकर, 2029 का लोकसभा चुनाव देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था में एक बड़े बदलाव का गवाह बनने वाला है।

SOURCE: न्यूज एजेंसी
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