चीन-पाक की नींद उड़ी! 10,000 KM की रफ्तार, S-400 भी होगा राख; जानिए भारत की सबसे घातक मिसाइल का सच

India News: भारत दोहरे सामरिक खतरे से निपटने के लिए अपनी रक्षा तैयारियों को नई ऊंचाई दे रहा है। चीन और पाकिस्तान की बढ़ती चुनौतियों के बीच रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन प्रोजेक्ट विष्णु पर तेजी से काम कर रहा है। इस अहम प्रोजेक्ट के तहत भारत दुनिया की सबसे घातक और तेज हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल विकसित कर रहा है। यह आधुनिक मिसाइल पलक झपकते ही दुश्मन के अभेद्य हवाई सुरक्षा तंत्र को पूरी तरह से तबाह कर सकती है।

प्रोजेक्ट विष्णु: भारतीय रक्षा प्रणाली का नया और अचूक ब्रह्मास्त्र

डीआरडीओ ने एक्सटेंडेड ट्रेजेक्टरी लॉन्ग ड्यूरेशन हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल के बूस्टर इंटीग्रेशन का काम शुरू कर दिया है। तकनीकी तौर पर यह निर्माण प्रक्रिया बेहद महत्वपूर्ण और जटिल मानी जा रही है। मिसाइल के विभिन्न हिस्सों को विशेष उपकरणों से सटीकता के साथ जोड़ा जा रहा है। प्रोजेक्ट विष्णु के तहत भारत करीब एक दर्जन अत्याधुनिक हथियार बना रहा है। इनमें आक्रामक और रक्षात्मक दोनों तरह की क्षमताएं शामिल हैं। यह नई मिसाइल डीप-स्ट्राइक प्लेटफॉर्म के रूप में काम करेगी।

स्क्रैमजेट इंजन की ताकत: 10,000 किलोमीटर प्रति घंटे की खौफनाक रफ्तार

इस शक्तिशाली मिसाइल की सबसे बड़ी खासियत इसका बेहद उन्नत स्क्रैमजेट इंजन है। यह खास इंजन वायुमंडल से सीधे ऑक्सीजन लेकर अपना ईंधन जलाता है। इससे मिसाइल बहुत हल्की और अत्यधिक मारक बन जाती है। जनवरी 2026 में डीआरडीओ के वैज्ञानिकों ने इस इंजन का सफल जमीनी परीक्षण पूरा किया है। यह घातक मिसाइल मैक आठ यानी करीब दस हजार किलोमीटर प्रति घंटे की खौफनाक रफ्तार से उड़ान भरेगी। इस तेज गति के कारण दुश्मन इसे ट्रैक नहीं कर पाएगा।

परमाणु हमले में पूरी तरह सक्षम और 2500 किलोमीटर की मारक रेंज

इस नई हाइपरसोनिक मिसाइल की शुरुआती मारक क्षमता पंद्रह सौ किलोमीटर तय की गई है। भविष्य में इसकी रेंज को पच्चीस सौ किलोमीटर तक आसानी से बढ़ाया जा सकता है। यह भारी-भरकम मिसाइल अपने साथ एक हजार से दो हजार किलोग्राम तक का पेलोड ले जाने में पूरी तरह सक्षम है। इसे पारंपरिक और परमाणु दोनों तरह के हथियारों से आसानी से लैस किया जा सकता है। भारी गर्मी से बचने के लिए इसमें थर्मल कोटिंग्स लगाई गई हैं।

S-400 और THAAD जैसे आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम होंगे पूरी तरह फेल

यह अचूक हाइपरसोनिक मिसाइल कम ऊंचाई पर तेजी से उड़ते हुए अचानक अपनी दिशा बदलने में सक्षम है। इसकी यह अप्रत्याशित गतिशीलता इसे आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम के खिलाफ बेहद खतरनाक बनाती है। S-400 और THAAD जैसे दुनिया के सबसे उन्नत रडार सिस्टम भी इसे रोकने में पूरी तरह नाकाम साबित होंगे। डीआरडीओ इस मिसाइल को जमीन, समुद्र और हवा तीनों मोर्चों से लॉन्च करने के लिए तैयार कर रहा है। इसे सुखोई फाइटर जेट से भी दागा जाएगा।

मिशन सुदर्शन चक्र और पांचवीं पीढ़ी के स्वदेशी फाइटर जेट्स की तैयारी

भारतीय रक्षा वैज्ञानिक मिसाइलों के साथ-साथ देश के विशाल एयरस्पेस को सुरक्षित करने के लिए मिशन सुदर्शन चक्र पर दिन-रात काम कर रहे हैं। इस अहम मिशन का मुख्य लक्ष्य किसी भी बाहरी हवाई खतरे से तत्काल निपटना है। देश में पांचवीं और छठी पीढ़ी के स्टेल्थ फाइटर जेट विकसित करने के लिए एएमसीए प्रोजेक्ट भी जोरों पर है। भारत अब अत्याधुनिक रक्षा उपकरणों के मामले में आत्मनिर्भर बनने की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहा है।

हाइपरसोनिक तकनीक कैसे बदल रही है आज के आधुनिक युद्ध का पूरा स्वरूप

ध्वनि की गति से पांच गुना ज्यादा तेज चलने वाली उन्नत मिसाइलों को हाइपरसोनिक कहा जाता है। पारंपरिक सबसोनिक और सुपरसोनिक मिसाइलों को आधुनिक रडार तकनीक से आसानी से ट्रैक किया जा सकता है। लेकिन घातक हाइपरसोनिक हथियारों को उनकी बेहद तेज गति के कारण रोकना लगभग असंभव होता है। इनमें स्क्रैमजेट इंजन और हीट-रेसिस्टेंट मैटेरियल का इस्तेमाल होता है। यही वजह है कि आज दुनिया के गिने-चुने ताकतवर देशों के पास ही यह विशेष रक्षा तकनीक मौजूद है।

SOURCE: न्यूज एजेंसी
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