Himachal News: हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आगामी स्थानीय चुनावों को लेकर एक बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि राज्य में पंचायती राज और शहरी निकायों के चुनाव पार्टी चिह्न पर नहीं होंगे। मुख्यमंत्री के इस फैसले से राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव आएगा। अब ग्राम पंचायत प्रधान और ब्लॉक समिति पदों के लिए कोई भी आम नागरिक बिना किसी राजनीतिक दल के समर्थन के अपना चुनाव स्वतंत्र रूप से लड़ सकेगा।
पार्टी सिंबल के बिना होगा चुनावी मुकाबला
मुख्यमंत्री सुक्खू ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए अपनी सरकार की रणनीति साफ की। उन्होंने बताया कि इस अहम फैसले पर कांग्रेस की नवगठित राजनीतिक मामलों की समिति जल्द मुहर लगाएगी। इसके साथ ही महिला आरक्षण विधेयक के महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी पार्टी के भीतर गहन चर्चा होगी। इस फैसले का मुख्य उद्देश्य जमीनी स्तर पर सच्चे और स्वतंत्र नेतृत्व को आगे लाना है। अब चुनाव में राजनीतिक दलों का सीधा दखल काफी हद तक कम हो जाएगा।
कांग्रेस संगठन में हो रहे हैं बड़े बदलाव
राज्य में चुनाव से पहले कांग्रेस पार्टी अपने आंतरिक संगठन को भी पूरी तरह से मजबूत कर रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि पार्टी की कार्यसमिति और सभी जिला अध्यक्षों की लगातार बैठकें आयोजित की जा रही हैं। नया राजनीतिक ढांचा तैयार करके सरकार जनता के बीच अपनी पकड़ और मजबूत करना चाहती है। बिना चुनाव चिह्न के मैदान में उतरने से पार्टी के स्थानीय कार्यकर्ताओं को भी अपनी व्यक्तिगत छवि साबित करने का एक बहुत बड़ा मौका मिलेगा।
मई से पहले होने हैं हजारों पदों पर चुनाव
हिमाचल प्रदेश में अगले कुछ महीनों में चुनावी सरगर्मी बहुत तेज होने वाली है। राज्य चुनाव आयोग को 31 मई से पहले 3,600 से अधिक ग्राम पंचायतों के चुनाव संपन्न कराने हैं। इसके अलावा सात नगर निगमों, 29 नगर परिषदों और 37 नगर पंचायतों में भी मतदान होगा। यह चुनाव राज्य सरकार के लिए एक बड़ा लिटमस टेस्ट माना जा रहा है। सरकार का यह नया फैसला इन हजारों सीटों पर उम्मीदवारों की किस्मत तय करेगा।
