India News: भारतीय जनता पार्टी के नेता हरिवंश नारायण सिंह ने बड़ा राजनीतिक मुकाम हासिल किया है। उन्हें तीसरी बार राज्यसभा के उपसभापति के रूप में निर्विरोध चुना गया है। इस बार विपक्ष की तरफ से कोई भी उम्मीदवार मैदान में नहीं उतरा था। उनका पिछला कार्यकाल नौ अप्रैल को खत्म हो गया था। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने शुक्रवार को चुनाव की तारीख तय की थी। इस जीत ने सदन में उनका दबदबा साबित कर दिया है।
कांग्रेस ने किया कड़ा विरोध और चुनाव का बहिष्कार
इस चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने हिस्सा नहीं लिया। मुख्य विपक्षी दल ने इस चुनावी प्रक्रिया का कड़ा बहिष्कार किया। कांग्रेस ने केंद्र की मोदी सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। विपक्ष का कहना है कि सरकार ने पिछले सात सालों से लोकसभा में उपाध्यक्ष नियुक्त नहीं किया है। कांग्रेस नेताओं ने सरकार के इस रवैये को एक गलत कदम बताया है। उन्होंने चुनाव से पहले विपक्ष के साथ कोई सलाह नहीं करने पर कड़ी आलोचना की।
एनडीए नेताओं ने पेश किया प्रस्ताव और मिली शानदार जीत
सदन में सत्ता पक्ष के नेताओं ने हरिवंश नारायण सिंह का पूरा समर्थन किया। बीजेपी और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के कई वरिष्ठ नेताओं ने उनकी उम्मीदवारी का प्रस्ताव रखा। इनमें सदन के नेता जेपी नड्डा और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण भी मुख्य रूप से शामिल थे। इन नेताओं के प्रस्ताव को पूरे सदन ने ध्वनि मत से तुरंत पारित कर दिया। इसके बाद राज्यसभा के सभापति ने हरिवंश नारायण सिंह को आधिकारिक तौर पर निर्वाचित घोषित कर दिया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दी बधाई और की जमकर तारीफ
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सदन में हरिवंश नारायण सिंह को जीत पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि लगातार तीसरी बार चुना जाना सदन के गहरे विश्वास को दर्शाता है। प्रधानमंत्री ने उनकी सहज कार्यशैली की बहुत सराहना की। उन्होंने बताया कि हरिवंश हमेशा सबको साथ लेकर चलने का प्रयास करते हैं। पूरे सदन ने आज उनकी इसी कार्यशैली पर अपनी मोहर लगाई है। उनके नेतृत्व में सदन की शक्ति हमेशा बहुत अधिक प्रभावी होती है।
विपक्ष की उम्मीदें और राष्ट्रपति द्वारा किया गया खास नामांकन
कांग्रेस पार्टी ने उम्मीद जताई है कि अपने तीसरे कार्यकाल में हरिवंश विपक्ष की चिंताओं पर ध्यान देंगे। वे चाहेंगे कि उपसभापति विपक्षी दलों के प्रति भी पर्याप्त संवेदनशीलता दिखाएं। हरिवंश अब उन गिने-चुने नेताओं में शामिल हो गए हैं। उन्होंने इस महत्वपूर्ण पद पर तीन कार्यकाल पूरे किए हैं। उनका कार्यकाल खत्म होने के ठीक एक दिन बाद ही राष्ट्रपति ने उन्हें नामित किया था। उन्हें राज्यसभा के लिए दोबारा सदस्य बनाकर भेजा गया था।
