Himachal News: हिमाचल प्रदेश में पंचायती राज चुनावों का बिगुल बज चुका है। राज्य सरकार ने जिला परिषद अध्यक्ष पदों के लिए आरक्षण रोस्टर जारी कर दिया है। इस बार महिला सशक्तिकरण पर खास जोर दिया गया है। प्रदेश के 12 में से 6 जिलों की कमान अब महिलाओं के हाथों में होगी। इस नई सूची के आते ही पूरे राज्य में सियासी हलचल तेज हो गई है। हर कोई अपने-अपने जिले के राजनीतिक समीकरण समझने में जुटा है।
इन जिलों में महिलाओं के लिए आरक्षित हुई सीट
रोस्टर के मुताबिक सिरमौर और सोलन में अनुसूचित जाति की महिला उम्मीदवार चुनाव लड़ेंगी। लाहौल-स्पीति की सीट अनुसूचित जनजाति की महिला के लिए तय की गई है। कांगड़ा जिले में अन्य पिछड़ा वर्ग की महिला दावेदारी पेश करेंगी। हमीरपुर और चम्बा जिले की कमान सामान्य वर्ग की महिला को सौंपी जाएगी। यह फैसला राजनीति में महिलाओं की भागीदारी को एक नई दिशा देगा। लोग इस कदम को बहुत सकारात्मक मान रहे हैं।
इन जिलों में भी तय हुए नए राजनीतिक समीकरण
मंडी जिले का अध्यक्ष पद अब अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित रहेगा। किन्नौर जिले की सीट अनुसूचित जनजाति वर्ग के खाते में गई है। वहीं शिमला, कुल्लू, ऊना और बिलासपुर को सामान्य श्रेणी में रखा गया है। यहां किसी भी वर्ग के उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा सकते हैं। आरक्षण की इस नई व्यवस्था ने कई पुराने नेताओं के समीकरण बिगाड़ दिए हैं। अब नए चेहरों को आगे आने का बड़ा मौका मिलेगा।
संभावित उम्मीदवारों ने तेज किया अपना चुनाव प्रचार
आरक्षण सूची आते ही प्रदेशभर में चुनावी सरगर्मियां काफी तेज हो गई हैं। संभावित उम्मीदवारों ने अपनी रणनीति को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। स्थानीय स्तर पर बैठकों और जनसंपर्क अभियानों का दौर भी बढ़ गया है। जिला परिषद अध्यक्ष का पद पंचायत चुनावों में बहुत अहम होता है। यह पद पूरे जिले के चुनावी गणित को सीधा प्रभावित करता है। सभी राजनीतिक दल अब जीतने वाले चेहरों की तलाश में हैं।
