अंतरजातीय विवाह में ब्राह्मणों ने सबको पछाड़ा, लेकिन सवर्ण महिलाओं पर अब भी है पहरा?

Telangana News: तेलंगाना के जातिगत सर्वेक्षण ने समाज की हैरान करने वाली तस्वीर पेश की है। रिपोर्ट के अनुसार अंतरजातीय विवाह के मामले में अयंगर और अय्यर ब्राह्मण सबसे आगे हैं। दूसरी तरफ रेड्डी और वेलामा जैसी संपन्न जातियों में आज भी रूढ़ियां कायम हैं। इन जातियों में महिलाओं को अपना जीवनसाथी चुनने की पूरी आजादी नहीं मिली है। यह आंकड़े समाज में बदलती सोच और कुछ पुरानी परंपराओं को स्पष्ट रूप से सबके सामने उजागर करते हैं।

शहरीकरण ने बदली ब्राह्मण समाज की पुरानी सोच

स्वतंत्र विशेषज्ञ कार्य समूह की इस खास रिपोर्ट में कई अहम बातें सामने आई हैं। सर्वे बताता है कि अंतरजातीय विवाह वाले परिवारों में बारह प्रतिशत हिस्सा अयंगर और अय्यर समाज का है। इसके बाद ईसाई और राजू समुदाय का नाम आता है। विशेषज्ञों का मानना है कि शहरीकरण इस बड़े बदलाव का एक मुख्य कारण हो सकता है। नब्बे प्रतिशत से अधिक ब्राह्मण शहरी इलाकों में बसते हैं।

अगड़ी जातियों में महिलाओं पर आज भी सख्त पहरा

न्यायाधीश बी सुदर्शन रेड्डी की अध्यक्षता वाले पैनल ने एक अहम चिंता भी जताई है। वेलामा और रेड्डी जैसे बेहद प्रभावशाली समूहों में अंतरजातीय विवाह की दर काफी कम है। यह आंकड़े दिखाते हैं कि आर्थिक रूप से मजबूत होने के बावजूद इनमें जाति के नियम कड़े हैं। इसका सीधा मतलब यह भी है कि इन अगड़ी जातियों में महिलाओं को अपनी मर्जी से विवाह करने का अधिकार नहीं है।

जनजातीय समुदायों में पुरानी परंपराओं का कड़ा असर

अंतरजातीय शादियां समाज में बढ़ती व्यक्तिगत आजादी का एक बड़ा प्रतीक मानी जाती हैं। हालांकि अनुसूचित जनजाति के भीतर आज भी पुरानी परंपराओं का गहरा असर देखा जा सकता है। कोलम और माली जैसी जनजातियां इस सूची में एकदम नीचे मौजूद हैं। यहां अंतरजातीय विवाह का आंकड़ा केवल दो दशमलव छह प्रतिशत ही दर्ज हुआ है। गोंड समुदाय में भी यह आंकड़ा मात्र दो दशमलव आठ प्रतिशत तक ही सीमित रहा है।

SOURCE: न्यूज एजेंसी
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