India News: लोकसभा में केंद्र सरकार को एक बहुत बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। सरकार को सदन में जरूरी दो-तिहाई बहुमत नहीं मिल सका। इसके कारण महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान संशोधन बिल गिर गया है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने इस फैसले का आधिकारिक ऐलान किया है। उन्होंने बताया कि मत विभाजन के दौरान बिल के पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े। अब इस अहम बिल पर आगे की कोई भी कार्यवाही संभव नहीं है।
संसदीय कार्य मंत्री ने रोके अन्य दो बिल
महिला आरक्षण बिल गिरने के बाद संसद में भारी हंगामा देखने को मिला। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सदन में एक बड़ी घोषणा की। उन्होंने साफ किया कि सरकार अब अन्य दो बिल भी आगे नहीं बढ़ाएगी। विपक्ष के भारी विरोध के बीच संविधान संशोधन विधेयक पर मतदान हुआ था। यह मतदान आम ध्वनि मत के जरिए सदन में नहीं कराया गया था। इसके लिए सदन में बाकायदा मत विभाजन की पूरी प्रक्रिया का पालन हुआ।
संविधान के अनुच्छेद 368 का हुआ पालन
सदन में इस बिल को पास कराने के लिए सख्त नियम लागू थे। संविधान के अनुच्छेद 368 के स्पष्ट नियमों के अनुसार यह मतदान हुआ था। इसके तहत लोकसभा की कुल सदस्य संख्या का बहुमत होना बेहद जरूरी था। सदन में मौजूद और वोट देने वाले सदस्यों का दो-तिहाई बहुमत भी आवश्यक था। लेकिन सरकार यह जरूरी जादुई आंकड़ा जुटाने में पूरी तरह से नाकाम रही। बहुमत न मिलने के कारण यह बिल शुरुआती स्तर पर ही खारिज हो गया।
अमित शाह ने कांग्रेस पर साधा कड़ा निशाना
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में विपक्ष पर तीखा हमला बोला। उन्होंने बिल पर हुई चर्चा का बेहद आक्रामक अंदाज में तुरंत जवाब दिया। शाह ने कहा कि राहुल गांधी की गैरमौजूदगी में कांग्रेस ने साजिश रची है। कांग्रेस ने सदन में जानबूझकर एक ऐसा सुनियोजित राजनीतिक जाल बिछाया है। उनका मकसद महिला आरक्षण को साल 2029 से पहले लागू होने से रोकना है। उन्होंने देश की मातृशक्ति को विपक्ष के इस राजनीतिक षड्यंत्र से आगाह किया।
महिलाओं के रास्ते का रोड़ा बना विपक्ष
गृह मंत्री ने सदन में बहुत स्पष्ट शब्दों में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि सरकार महिला आरक्षण को 2029 से पहले लागू करना चाहती है। लेकिन विपक्ष इस बिल को 2029 के बाद ले जाना चाहता है। सरकार विपक्ष के इस खतरनाक मंसूबे को कभी कामयाब नहीं होने देगी। शाह ने चेतावनी दी कि देश की करोड़ों महिलाएं सब कुछ देख रही हैं। वे जान गई हैं कि उनके अधिकारों के रास्ते का सबसे बड़ा रोड़ा कौन है।
धर्म आधारित आरक्षण पर इंडिया गठबंधन को घेरा
अमित शाह ने इंडिया गठबंधन की राजनीति पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान धर्म के आधार पर आरक्षण को नहीं मानता है। इसके बावजूद विपक्ष लगातार देश में तुष्टिकरण की गंदी राजनीति कर रहा है। इंडिया गठबंधन के नेता मुसलमानों के लिए विशेष आरक्षण की मांग कर रहे हैं। शाह ने चुनौती दी कि विपक्ष संविधान का वह संबंधित अनुच्छेद तुरंत बताए। जो धर्म के आधार पर किसी भी तरह के आरक्षण की इजाजत देता हो।
