Himachal News: मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में आयोजित मंत्रिमंडल की बैठक में प्रदेश के होम स्टे संचालकों के लिए बड़ी राहत का एलान किया गया है। सरकार ने पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से फायर एनओसी की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया है। अब संचालकों को केवल अग्निशामक यंत्र लगाने होंगे। इसके साथ ही मंत्रिमंडल ने सामाजिक सुरक्षा पेंशन के नियमों में संशोधन और जल विद्युत परियोजनाओं के आवंटन समेत कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी है।
होम स्टे संचालकों के लिए नियमों में बड़ी ढील
हिमाचल सरकार ने होम स्टे संचालकों के लिए फायर अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) की प्रक्रिया को सुगम बना दिया है। नए प्रावधानों के अनुसार अब संचालकों को फायर विभाग से एनओसी लेने की जरूरत नहीं होगी। हालांकि सुरक्षा के लिहाज से परिसर में फायर एक्सटिंग्विशर लगाना अनिवार्य रहेगा। पर्यटन विभाग इन सुरक्षा उपायों की निरंतर मॉनीटरिंग करेगा। इस फैसले से आवासीय भवन मालिकों को बड़ी राहत मिलेगी और व्यापार करना आसान होगा।
जल भंडारण क्षमता में मिली भारी छूट
मंत्रिमंडल ने होम स्टे के लिए जल भंडारण टैंक के कड़े नियमों में भी बदलाव किया है। पहले संचालकों के लिए डेढ़ लाख लीटर क्षमता का जल भंडारण टैंक बनाना अनिवार्य था। अब इस सीमा को भारी कटौती के साथ महज 5,000 लीटर कर दिया गया है। यह निर्णय विशेष रूप से छोटे संचालकों के लिए आर्थिक बोझ कम करने वाला साबित होगा। इससे राज्य में ग्रामीण पर्यटन को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
लघु जलविद्युत परियोजनाओं का होगा आवंटन
प्रदेश की हाईड्रो पावर पॉलिसी-2006 के तहत सरकार ने 71 लघु जलविद्युत परियोजनाएं आवंटित करने का निर्णय लिया है। ये परियोजनाएं उन स्वतंत्र विद्युत उत्पादकों को दी जाएंगी जिन्होंने पात्रता के सभी मापदंड पूरे कर लिए हैं। हिम ऊर्जा विभाग को इन चिन्हित परियोजनाओं के लिए कई आवेदन प्राप्त हुए थे। सरकार का यह कदम राज्य में नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा।
न्यायाधीशों के लिए नई गाड़ियों की खरीद को मंजूरी
उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने बताया कि मंत्रिमंडल ने न्यायिक व्यवस्था के सुदृढ़ीकरण के लिए भी कदम उठाए हैं। हाईकोर्ट के 4 जजों के लिए नई इनोवा गाड़ियां खरीदने की स्वीकृति प्रदान की गई है। इसी तरह जिला और सत्र न्यायाधीशों के लिए भी गाड़ियों की खरीद को मंजूरी मिली है। यह निर्णय न्यायिक अधिकारियों की कार्यकुशलता और सुगम आवाजाही को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
सिरमौर में जल शक्ति मंडलों का पुनर्गठन
प्रशासनिक व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए सिरमौर जिले में जल शक्ति विभाग के मंडलों का पुनर्गठन होगा। अब इन मंडलों का निर्धारण विधानसभा क्षेत्र के आधार पर किया जाएगा। पहले एक मंडल का कार्यक्षेत्र कई विधानसभा क्षेत्रों में फैला हुआ था जिससे जनता को परेशानी होती थी। इस पुनर्गठन के बाद विभाग आम लोगों को बेहतर और त्वरित सेवाएं उपलब्ध करवा सकेगा। प्रशासनिक पारदर्शिता की दिशा में यह बड़ा कदम है।
पेंशन भुगतान और परमवीर चक्र विजेता की सेवाएं
मंत्रिमंडल ने सामाजिक सुरक्षा पेंशन के समय पर भुगतान के लिए नियमों में संशोधन किया है। नियम 10 (2) और (3) में बदलाव से लाभार्थियों को अब बिना देरी के आर्थिक सहायता मिलेगी। इसके अलावा युवाओं को सेना में भर्ती के लिए प्रेरित करने हेतु परमवीर चक्र विजेता कैप्टन संजय कुमार की सेवाएं ली जाएंगी। वे 1 मई से युवाओं को सेना और अन्य सेवाओं के लिए मार्गदर्शन प्रदान करेंगे।
नगर निगम शिमला की परिसंपत्तियों का स्थानांतरण
शिमला में वर्ल्ड बैंक के सहयोग से चल रही पेयजल योजना के तहत परिसंपत्तियों का स्थानांतरण किया जाएगा। नगर निगम और लोक निर्माण विभाग के पास मौजूद संपत्तियां अब शहरी विकास विभाग को सौंपी जाएंगी। इस पूरी योजना की मॉनीटरिंग और संचालन शिमला जल प्रबंधन निगम द्वारा किया जा रहा है। इस हस्तांतरण से शहर की जल वितरण प्रणाली के प्रबंधन में अधिक स्पष्टता और सुधार आने की उम्मीद है।
