चिंतपूर्णी मंदिर के धन पर अफसरों की ऐश! हाईकोर्ट ने डीसी ऊना की गाड़ी जब्त करने के दिए सख्त आदेश

Himachal News: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने माता श्री चिंतपूर्णी मंदिर न्यास की संपत्तियों के दुरुपयोग पर कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बीसी नेगी की खंडपीठ ने मंदिर के कोष से खरीदी गई उन गाड़ियों को जब्त करने के आदेश दिए हैं, जिनका इस्तेमाल डीसी ऊना और पुलिस विभाग कर रहे थे। अदालत ने इस मामले में कड़ा संज्ञान लेते हुए मुख्य सचिव और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

मंदिर के पैसे से अफसरों की सवारी पर लगी रोक

न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि मंदिर की संपत्ति और धन का उपयोग केवल धार्मिक और जनहित कार्यों के लिए होना चाहिए। याचिकाकर्ता अंकुर कालिया ने जनहित याचिका के माध्यम से कोर्ट को बताया कि डीसी ऊना मंदिर के पैसे से ली गई टोयोटा इनोवा क्रिस्टा का निजी उपयोग कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त, मंदिर को दान में मिली एक अन्य गाड़ी का इस्तेमाल पुलिस विभाग द्वारा किया जा रहा है। हाईकोर्ट ने इन वाहनों को तुरंत कब्जे में लेकर सुरक्षित रखने को कहा है।

आईएएस अधिकारियों की बढ़ी मुश्किलें, कोर्ट ने मांगा बॉन्ड

इस मामले में वर्तमान डीसी जतिन लाल और तत्कालीन डीसी राघव शर्मा को प्रतिवादी बनाया गया है। याचिकाकर्ता ने मांग की है कि राघव शर्मा से 30 लाख रुपए का व्यक्तिगत बॉन्ड लिया जाए। यदि वे दोषी पाए जाते हैं, तो मंदिर के कोष को हुए 2.29 करोड़ रुपए से अधिक के नुकसान की भरपाई उन्हें अपने निजी धन से करनी होगी। कोर्ट इस बात की जांच कर रहा है कि किस अधिकार के तहत मंदिर के संसाधनों का व्यक्तिगत लाभ के लिए उपयोग किया गया।

संपत्तियों की खरीद-फरोख्त पर हाईकोर्ट की पाबंदी

अदालत ने मंदिर न्यास की सभी चल और अचल संपत्तियों के हस्तांतरण पर फिलहाल रोक लगा दी है। अब बिना न्यायालय की अनुमति के मंदिर की किसी भी संपत्ति को न तो बेचा जा सकेगा और न ही दान दिया जा सकेगा। प्रार्थी ने अदालत से मांग की है कि मंदिर प्रशासन को सभी संपत्तियों के संबंध में यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए जाएं। इस आदेश से मंदिर प्रबंधन में व्याप्त अनियमितताओं पर लगाम लगने की उम्मीद जगी है।

लॉगबुक और वाहनों का पूरा रिकॉर्ड होगा पेश

हाईकोर्ट ने वर्ष 2022 से 2024 की अवधि के दौरान उपयोग किए गए सभी वाहनों का विस्तृत रिकॉर्ड मांगा है। इसमें मारुति सुजुकी और टाटा सफारी जैसी गाड़ियों की मूल लॉगबुक भी शामिल है। प्रतिवादियों को अब मंदिर के नियंत्रण में मौजूद सभी वाहनों की सूची और उनके वर्तमान उपयोग का विवरण देना होगा। कोर्ट यह सुनिश्चित करना चाहता है कि मंदिर के संसाधनों के उपयोग में पूरी पारदर्शिता बरती जाए और किसी भी स्तर पर धन का अपव्यय न हो।

भ्रष्टाचार और निर्देशों की अवहेलना का गंभीर आरोप

याचिका में आरोप लगाया गया है कि प्रशासनिक अधिकारियों ने न केवल ट्रस्ट की संपत्तियों का दुरुपयोग किया, बल्कि पूर्व में दिए गए हाईकोर्ट के निर्देशों की भी अवहेलना की है। मंदिर प्रबंधन समिति के सह-आयुक्तों पर पद के दुरुपयोग के गंभीर आरोप लगे हैं। इस मामले की अगली सुनवाई में सरकार को यह स्पष्ट करना होगा कि मंदिर का धन अधिकारियों की सुविधाओं पर क्यों खर्च किया जा रहा था। इस कार्रवाई से प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है।

SOURCE: न्यूज एजेंसी
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