हिमाचल के दो भाइयों की एक पत्नी और अब घर आई नन्ही परी, सोशल मीडिया पर छिड़ी ‘असली पिता’ की जंग

Himachal News: हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के शिलाई गांव में एक अनोखी परंपरा और उससे जुड़ी एक खबर ने इंटरनेट पर हलचल मचा दी है। पिछले साल जुलाई में एक ही महिला से शादी करने वाले दो सगे भाइयों, कपिल और प्रदीप के घर अब एक नन्ही परी ने जन्म लिया है। शादी के करीब दस महीने बाद आई इस खुशखबरी के बाद जहां परिवार में उत्सव का माहौल है, वहीं सोशल मीडिया पर ‘बच्ची का असली पिता कौन है’ को लेकर एक बड़ी बहस छिड़ गई है।

सिरमौर की ‘बहुपति’ परंपरा और नन्ही परी का आगमन

शिलाई गांव के रहने वाले कपिल और प्रदीप ने कुनहाट गांव की सुनीता चौहान से सामूहिक रूप से शादी की थी। यह शादी हाटी समुदाय की प्राचीन ‘बहुपति’ (पॉलीएंड्री) परंपरा के तहत हुई थी। जुलाई 2025 में हुई इस शादी के बाद अब सुनीता ने एक बेटी को जन्म दिया है। इस अनोखे परिवार को बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है, लेकिन कानूनी दस्तावेजों और जैविक पिता की पहचान को लेकर लोग अपनी जिज्ञासा और सवाल सोशल मीडिया पर साझा कर रहे हैं।

मेडिकल साइंस और डीएनए टेस्ट पर क्या बोले विशेषज्ञ?

इस उलझन को सुलझाने के लिए चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि सामाजिक और कानूनी रूप से पिता का नाम स्थानीय प्रथाओं पर निर्भर करता है। एम्स नई दिल्ली की पूर्व विभाग अध्यक्ष डॉ. सुनीता मित्तल के अनुसार, ऐसे मामलों में अक्सर घर के बड़े भाई का नाम ही पिता के रूप में दस्तावेजों में दर्ज किया जाता है। हालांकि, अगर वैज्ञानिक रूप से जैविक पिता की पहचान करनी हो, तो उसके लिए डीएनए (DNA) जांच ही एकमात्र और सटीक जरिया है।

सगे भाई होने के कारण डीएनए में कितनी होगी समानता?

डॉ. मित्तल ने बताया कि चूंकि बच्ची के दोनों संभावित पिता सगे भाई हैं, इसलिए उनके डीएनए में काफी समानताएं होंगी। मानव शरीर के 46 क्रोमोसोम में हजारों डीएनए होते हैं, जिनसे पितृत्व का पता लगाया जा सकता है। सगे भाई होने के बावजूद आधुनिक तकनीक से यह आसानी से स्पष्ट किया जा सकता है कि बच्ची का जैविक पिता कौन है। हालांकि, ब्लड ग्रुप से भी अंदाजा लगाया जा सकता है, लेकिन वह डीएनए जितना सटीक परिणाम नहीं देता है।

नवजात का डीएनए टेस्ट कब और क्यों नहीं करना चाहिए?

विशेषज्ञों के अनुसार, नवजात बच्चों का तुरंत डीएनए टेस्ट करने से बचना चाहिए। आमतौर पर जन्म के कम से कम 15 दिन या तीन हफ्ते बाद ही यह जांच की जानी चाहिए, ताकि परिणाम पूरी तरह सही आएं। सबसे बेहतर समय बच्चे के तीन महीने का होने के बाद माना जाता है। इस मामले में परिवार या समुदाय की ओर से फिलहाल ऐसी कोई मांग नहीं की गई है, क्योंकि वे अपनी पुरानी परंपराओं और आपसी विश्वास के साथ जीवन जी रहे हैं।

क्या है इस अनोखी शादी के पीछे का मुख्य तर्क?

कपिल नेगी वर्तमान में बहरीन में नौकरी कर रहे हैं, जबकि प्रदीप सरकारी सेवा में हैं। हाटी समुदाय में इस बहुपति प्रथा के पीछे ठोस सामाजिक और आर्थिक तर्क दिए जाते हैं। इसका मुख्य उद्देश्य परिवार की पैतृक संपत्ति को बंटने से बचाना और भाइयों के बीच आपसी प्रेम और संयुक्त परिवार के ढांचे को बनाए रखना है। इस परंपरा के तहत एक ही युवती परिवार के दो या उससे अधिक भाइयों को अपना पति स्वीकार करती है।

SOURCE: न्यूज एजेंसी
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