World News: अमेरिका और ईरान के बीच महीनों से जारी तनाव के बीच पूरी दुनिया के लिए एक सुखद खबर आई है। दोनों देशों के बीच युद्ध के बादल अब धीरे-धीरे छंटते दिखाई दे रहे हैं। 17 अप्रैल को ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने एक बड़ा ऐलान किया, जिससे ग्लोबल मार्केट में हलचल मच गई है। ईरान ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को फिर से व्यापार के लिए खोल दिया है।
होर्मुज खुलते ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में मची खलबली
ईरान के विदेश मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी दी कि अब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज सभी देशों के वाणिज्यिक जहाजों के लिए खुला है। लेबनान के साथ सीजफायर की घोषणा के बाद ईरान ने यह साहसी कदम उठाया है। लगभग 49 दिनों के लंबे अंतराल के बाद इस समुद्री रास्ते को खोला गया है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि सीजफायर की शेष अवधि के दौरान यह मार्ग पूरी तरह से सुरक्षित और खुला रहेगा।
कच्चे तेल की कीमतों में 10 फीसदी की ऐतिहासिक गिरावट
ईरान के इस एक फैसले ने वैश्विक तेल बाजार में भूचाल ला दिया है। शुक्रवार को डब्ल्यूटीआई (WTI) क्रूड ऑयल की कीमत में 11.35 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई। अब डब्ल्यूटीआई क्रूड गिरकर 83 डॉलर के स्तर पर आ गया है। वहीं ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में भी 9.42 प्रतिशत की कमी देखी गई। ब्रेंट क्रूड अब 89.18 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है। गैस की कीमतें भी सात प्रतिशत से ज्यादा टूट चुकी हैं।
क्यों कहा जाता है इसे दुनिया की ‘तेल लाइफलाइन’?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण समुद्री पट्टी है। यहां से वैश्विक तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है। इस छोटे से रास्ते से हर दिन 1.8 करोड़ से 2 करोड़ बैरल कच्चा तेल निकाला जाता है। ईरान ने 28 फरवरी को इस गलियारे पर पाबंदी लगा दी थी। इसके चलते तेल की कीमतें 65 डॉलर से बढ़कर सीधे 120 डॉलर तक पहुंच गई थीं। सप्लाई बहाल होने से अब ऊर्जा संकट टलने के आसार हैं।
भारत के लिए इस खबर के क्या हैं मायने?
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर बहुत अधिक निर्भर है। भारत के कुल कच्चे तेल का लगभग 40 प्रतिशत और एलएनजी का 54 प्रतिशत हिस्सा इसी होर्मुज रास्ते से होकर आता है। फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच का यह मार्ग भारत के व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। होर्मुज खुलने से भारत में एलपीजी और तेल का संकट खत्म होने की उम्मीद है। इससे पेट्रोल-डीजल की महंगाई पर भी लगाम लगेगी।
ग्लोबल ट्रेड के लिए रूस और ईरान का साझा सहयोग
ईरानी विदेश मंत्री अराघची ने बताया कि इस मार्ग को खोलने के लिए रूस और ईरान के बीच पहले से ही तालमेल बना लिया गया था। सभी जरूरी कोऑर्डिनेट्स और सुरक्षा मानकों को तय कर लिया गया है। इस रास्ते के खुलने से न केवल भारत बल्कि यूरोप और एशियाई देशों को भी बड़ी राहत मिलेगी। सप्लाई चेन फिर से पटरी पर लौटने से दुनिया भर में माल ढुलाई और लॉजिस्टिक्स की लागत में भी कमी आने की संभावना है।
