World News: ईरान के साथ चल रहे युद्ध का असर अमेरिका की हथियार आपूर्ति पर साफ दिखने लगा है। अमेरिकी अधिकारियों ने यूरोपीय सहयोगियों को बताया है कि पहले से ऑर्डर किए गए कुछ हथियारों की डिलीवरी में देरी हो सकती है। इसकी वजह ईरान युद्ध के कारण अमेरिकी हथियार भंडार पर बढ़ता दबाव है। बाल्टिक और स्कैंडिनेविया समेत कई यूरोपीय देश प्रभावित हो सकते हैं।
FMS डील अटकी, यूरोपीय देशों में बढ़ी नाराजगी, अब अपने हथियारों पर जोर
ये हथियार फॉरेन मिलिट्री सेल्स (FMS) प्रोग्राम के तहत खरीदे गए थे। इस प्रोग्राम में अमेरिकी सरकार की मंजूरी और लॉजिस्टिक सपोर्ट के साथ हथियारों की खरीद होती है। डोनाल्ड ट्रंप के दौर में अमेरिका ने नाटो देशों पर अमेरिकी हथियार खरीदने का दबाव डाला था। अब डिलीवरी में देरी से यूरोपीय देशों में नाराजगी बढ़ रही है। कई देश अब अपने यहां बने रक्षा उपकरणों की तरफ रुख करने लगे हैं।
मिडिल ईस्ट युद्ध से भंडार पर तिगुना दबाव, रूस-यूक्रेन और गाजा के बाद ईरान ने बढ़ाई मुश्किल
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, मिडिल ईस्ट में युद्ध के कारण हथियारों की मांग अचानक बढ़ गई है। 28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल हमलों के बाद ईरान ने खाड़ी देशों पर कई मिसाइल और ड्रोन हमले किए। इन्हें रोकने में भारी हथियार इस्तेमाल हो रहे हैं। अमेरिका के भंडार पर पहले से ही दबाव था। साल 2022 के रूस-यूक्रेन युद्ध और 2023 के गाजा संघर्ष के बाद से लगातार हथियार भेजे जा रहे हैं। अब हालात ऐसे हैं कि यूरोप के लिए तैयार खेप भी अटक रही है। यूरोपीय देशों ने इस मामले पर अमेरिका से स्पष्टीकरण मांगा है। फिलहाल अमेरिकी रक्षा विभाग ने इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।
