Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश के दुर्गम जनजातीय उपमंडल पांगी में वन माफिया ने एक बार फिर पर्यावरण को गहरा जख्म दिया है। पांगी फॉरेस्ट डिवीजन के मिंधल क्षेत्र में देवदार के हरे पेड़ों पर कटिंग मशीनें चलाकर उन्हें धराशायी कर दिया गया। इस ताजा घटना ने न केवल वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि स्थानीय लोगों में भी गहरा रोष पैदा कर दिया है। विभाग ने मामले की पुष्टि करते हुए अज्ञात अपराधियों के खिलाफ पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई है।
मिंधल के वार्निन्यू जंगल में माफिया की बड़ी सेंधमारी
पांगी के डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर (DFO) रवि गुलेरिया ने बताया कि सच रेंज के तहत आने वाले वार्निन्यू जंगल में अवैध कटान की सूचना मिली थी। टीम के निरीक्षण के दौरान वहां पांच से सात हरे देवदार के पेड़ों के ताज़ा ठूंठ पाए गए। माफिया ने न केवल पेड़ों को काटा, बल्कि मौके पर ही उन्हें मशीनों से प्रोसेस कर टिम्बर (इमारती लकड़ी) तैयार कर ली थी। विभाग ने भारी मात्रा में तैयार लकड़ी को जब्त कर लिया है, जिसे तस्करी के इरादे से छिपाया गया था।
10 दिन में दूसरी बड़ी वारदात, अब तक खाली हाथ है पुलिस
पांगी घाटी में लकड़ी माफिया के हौसले इतने बुलंद हैं कि यह पिछले 10 दिनों में दूसरी बड़ी घटना है। इससे पहले चौरई जंगल में भी सात से आठ देवदार के पेड़ों को इसी तरह अवैध रूप से काटा गया था। हैरानी की बात यह है कि चौरई मामले में अब तक किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। एक के बाद एक हो रही इन घटनाओं से साफ है कि दुर्गम इलाकों में वन माफिया का नेटवर्क विभाग की निगरानी व्यवस्था से कहीं अधिक मजबूत और सक्रिय है।
लापरवाह अधिकारियों पर गिरेगी गाज, नोटिस जारी
वन विभाग ने इस बार कड़ा रुख अपनाते हुए अपने ही कर्मचारियों की जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। चौरई मामले में पहले ही वन रक्षक और वन मित्रों को कारण बताओ नोटिस दिए जा चुके हैं। ताजा मिंधल मामले में भी संबंधित बीट और रेंज के अधिकारियों के खिलाफ सिविल सेवा आचरण नियमों के तहत नोटिस जारी करने की तैयारी है। विभाग ने जांच के लिए एक उच्च स्तरीय कमेटी गठित की है, जो इस लापरवाही की तह तक जाएगी।
स्थानीय जनता में उबाल, पांगवाल एकता मंच ने दी चेतावनी
पर्यावरण को हो रहे इस नुकसान पर पांगवाल एकता मंच ने कड़ी नाराजगी जताई है। मंच के अध्यक्ष त्रिलोक ठाकुर का कहना है कि बार-बार हो रही चोरियां कानून के खौफ की कमी को दर्शाती हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि वन माफिया और उनके मददगारों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो पांगी की प्राकृतिक संपदा पूरी तरह नष्ट हो जाएगी। उन्होंने सरकार से मांग की है कि इन दुर्गम क्षेत्रों में आधुनिक तकनीक और ड्रोन के जरिए वन निगरानी को सुदृढ़ किया जाए।
