Himachal News: हिमाचल प्रदेश के सोलन में स्थित ‘चेस्टर हिल्स’ हाउसिंग प्रोजेक्ट अब एक बड़े कानूनी संकट में फंस गया है। जांच में सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि कंपनी में काम करने वाले एक स्थानीय व्यक्ति, हंसराज ठाकुर के नाम पर 150 बीघा बेनामी जमीन खरीदी गई थी। राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के पुख्ता संकेत दिए हैं। सरकार ने चेतावनी दी है कि इस फर्जीवाड़े में शामिल किसी भी अधिकारी, आर्किटेक्ट या चार्टर्ड अकाउंटेंट को बख्शा नहीं जाएगा।
आय से अधिक संपत्ति और बेनामी पैसे का खेल
राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी के अनुसार, हंसराज ठाकुर, उनकी पत्नी लता ठाकुर और उनकी दो बहनों के नाम पर कुल 275 बीघा जमीन का रिकॉर्ड मिला है। यह विशाल संपत्ति इन व्यक्तियों की घोषित आय के स्रोतों से बिल्कुल मेल नहीं खाती है। जांच में यह भी पाया गया कि इस जमीन पर वास्तविक नियंत्रण ‘एनजी एस्टेट’ और ‘चेस्टर हिल्स’ जैसे गैर-कृषक प्रमोटर्स का है। यह सीधे तौर पर बेनामी संपत्ति और मनी लॉन्ड्रिंग का मामला बनता है, क्योंकि इसमें संदिग्ध धन का भारी लेनदेन हुआ है।
विपक्ष के आरोपों पर सरकार का पलटवार
मंत्री नेगी ने विपक्ष द्वारा लगाए गए 1500 करोड़ रुपये के घोटाले के दावों को खारिज कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि 150 बीघा जमीन की वास्तविक कीमत लगभग 300 करोड़ रुपये है। उन्होंने आश्वासन दिया कि मामला चाहे कितना भी बड़ा हो, जांच पूरी निष्पक्षता से होगी। उपायुक्त सोलन को स्वतंत्र जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है। सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि राजस्व नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
चार स्तरों पर चल रही है सघन जांच
चेस्टर हिल मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे चार अलग-अलग स्तरों पर खंगाला जा रहा है। जिला समाहर्ता सोलन मुख्य जांच का नेतृत्व कर रहे हैं। वहीं, नगर एवं ग्राम नियोजन (TCP) विभाग और नगर निगम सोलन स्वीकृत नक्शों की वैधता की जांच कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त, रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) और धारा 118 के उल्लंघन से संबंधित पहलुओं की भी बारीकी से तफ्तीश की जा रही है। इस बहुआयामी जांच से कई सफेदपोश चेहरों के बेनकाब होने की उम्मीद है।
पंजीकरण रद्द करने की तैयारी और कानूनी पेच
चेस्टर हिल-2 और 4 परियोजनाओं का पंजीकरण रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। रेरा की जांच में प्रमोटर्स द्वारा जिम्मेदारियों की अनदेखी, स्वीकृत नक्शों में छेड़छाड़ और बिना कंप्लीशन सर्टिफिकेट के कब्जा देने जैसे गंभीर मामले सामने आए हैं। इस बीच, रेरा के पूर्व अध्यक्ष श्रीकांत बाल्दी ने मुख्यमंत्री से मिलने का समय मांगा है। वे मुख्य सचिव संजय गुप्ता द्वारा पारित उन दो आदेशों को चुनौती देने की तैयारी में हैं, जिन्हें वे अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर बता रहे हैं।
