Business News: केंद्र सरकार के करीब 1.2 करोड़ कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए वेतन वृद्धि को लेकर एक बड़ी खबर आई है। नेशनल काउंसिल (JCM) के स्टाफ साइड ने 8वें वेतन आयोग को 51 पन्नों का एक विस्तृत मेमोरेंडम सौंपा है। इसमें न्यूनतम बेसिक सैलरी को सीधे 69,000 रुपये करने का क्रांतिकारी प्रस्ताव रखा गया है। यह मांग केवल फिटमेंट फैक्टर बढ़ाने तक सीमित नहीं है। यह वेतन तय करने के दशकों पुराने फॉर्मूले को बदलने की एक बड़ी कोशिश है।
3 सदस्य नहीं, अब 5 यूनिट से होगी सैलरी की गणना
8वें वेतन आयोग के समक्ष रखी गई मांगों में सबसे महत्वपूर्ण बदलाव ‘परिवार’ की परिभाषा से जुड़ा है। अब तक सैलरी कैलकुलेशन के लिए परिवार को 3 यूनिट माना जाता था। लेकिन स्टाफ साइड ने अब 5-यूनिट फैमिली फ्रेमवर्क का प्रस्ताव दिया है। इसमें कर्मचारी और जीवनसाथी के अलावा दो बच्चे और आश्रित माता-पिता को भी शामिल किया गया है। यह बदलाव बुज़ुर्गों की देखभाल की सामाजिक और कानूनी जिम्मेदारी को ध्यान में रखते हुए प्रस्तावित किया गया है।
कैलोरी और ‘लिविंग वेज’ पर आधारित नया ढांचा
वेतन आयोग को दिए गए मेमोरेंडम में आहार संबंधी मानकों में भी बड़े बदलाव की मांग की गई है। पहले का ढांचा 2700 kcal पर आधारित था। लेकिन अब ICMR के सुझावों के अनुसार इसे बढ़ाकर 3490 kcal करने का प्रस्ताव है। इसमें प्रोटीन युक्त आहार जैसे दूध, अंडे और फल-सब्जियों के खर्च को शामिल किया गया है। प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य कर्मचारियों को केवल ‘गुजारा भत्ता’ देने के बजाय एक सम्मानजनक ‘लिविंग वेज’ प्रदान करना है।
फिटमेंट फैक्टर में 3.83 गुना बढ़ोतरी की मांग
अगर स्टाफ साइड की सिफारिशों को मान लिया जाता है, तो फिटमेंट फैक्टर में भारी बढ़ोतरी होगी। इसे 7वें वेतन आयोग के 2.57 से बढ़ाकर 3.83 करने का प्रस्ताव है। इससे सभी पे लेवल के कर्मचारियों की सैलरी में बड़ा उछाल आएगा। इसके अलावा सालाना इंक्रीमेंट को भी 3% से बढ़ाकर 6% करने का सुझाव दिया गया है। आयोग ने इस पूरी प्रक्रिया पर स्टेकहोल्डर्स से इनपुट के लिए 30 अप्रैल 2026 तक का समय दिया है।
1 जनवरी 2026 से लागू हो सकती हैं सिफारिशें
कर्मचारी संगठनों ने मांग की है कि इन सिफारिशों को 1 जनवरी 2026 से प्रभावी रूप से लागू किया जाए। इसमें ऑटोनॉमस बॉडीज के कर्मचारी और 2026 से पहले रिटायर हुए पेंशनभोगियों को भी संशोधित वेतन का लाभ देने की बात कही गई है। मेमोरेंडम में इस बात पर जोर दिया गया है कि सैलरी का नया ढांचा आधुनिक डिजिटल जरूरतों, शिक्षा और स्वास्थ्य के बढ़ते खर्चों को वास्तविक रूप में दिखाने वाला होना चाहिए।
