Delhi News: देश की राजधानी दिल्ली में भीषण गर्मी का संकट गहराता जा रहा है। जलवायु अनुसंधान संस्था ‘एनवायरोकैटालिस्ट्स’ की ताजा रिपोर्ट ने वैज्ञानिकों को हैरान कर दिया है। उपग्रह आधारित विश्लेषण के मुताबिक दिल्ली में पारा बढ़ने की रफ्तार अब अनियंत्रित हो चुकी है। साल 2011 से जारी इस खतरनाक प्रवृत्ति के कारण शहर के सभी 250 वार्ड अब ‘हीट स्ट्रेस’ की चपेट में हैं। रिपोर्ट चेतावनी देती है कि दिल्ली की जमीन अब पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा तप रही है।
तापमान में दर्ज हुई रिकॉर्ड तोड़ बढ़ोतरी
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के आंकड़े दिल्ली की डरावनी तस्वीर पेश कर रहे हैं। साल 2011 में मार्च का औसत अधिकतम तापमान 30.0 डिग्री सेल्सियस था। मात्र 15 वर्षों के अंतराल में यह 2026 में बढ़कर 32.6 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। यानी तापमान में 2.6 डिग्री सेल्सियस का सीधा उछाल आया है। सिर्फ हवा ही नहीं, बल्कि उपग्रह डेटा के अनुसार दिल्ली का औसत ‘लैंड सरफेस टेम्परेचर’ भी 2.9 डिग्री सेल्सियस बढ़ चुका है।
संगम विहार और संगम विहार (ए) सबसे ज्यादा प्रभावित
इस रिपोर्ट का सबसे डरावना पहलू वार्ड-स्तर पर तापमान की भारी असमानता है। दक्षिण दिल्ली की घनी आबादी वाला इलाका संगम विहार (ए) गर्मी की सबसे भीषण मार झेल रहा है। यहां साल 2015 से 2026 के बीच तापमान में 6.1 डिग्री की भारी बढ़त दर्ज की गई। इसी तरह मीठापुर, मदनगीर और तिगरी जैसे इलाकों में भी तापमान 5 डिग्री तक बढ़ा है। शहर के अलग-अलग वार्डों के बीच तापमान का अंतर अब 5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है।
कंक्रीट के जंगल और बारिश की कमी है मुख्य कारण
एनवायरोकैटालिस्ट्स के संस्थापक सुनील दहिया ने इस स्थिति के लिए बढ़ते कंक्रीट निर्माण को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने बताया कि जहां पहले पार्क और तालाब थे, वहां अब कंक्रीट की इमारतें खड़ी हो गई हैं। कंक्रीट की ये सतहें सौर विकिरण को तेजी से सोखती हैं, जिससे रात में भी ठंडक नहीं मिल पाती। साथ ही इस साल दक्षिण दिल्ली में सामान्य से 19 प्रतिशत कम वर्षा हुई है। कम बारिश के कारण आसमान साफ रहता है और तपिश बढ़ जाती है।
वार्ड-स्तरीय हीट एक्शन प्लान की तत्काल जरूरत
डेटा के अनुसार 16 अप्रैल 2026 तक दिल्ली का पारा 40.3 डिग्री सेल्सियस के पार जा चुका है। मई और जून के महीनों में हालात और भी भयावह होने की आशंका है। विशेषज्ञों का कहना है कि अब पूरी दिल्ली के लिए एक जैसी नीति काम नहीं करेगी। अब समय आ गया है कि हर वार्ड के लिए अलग ‘हीट एक्शन प्लान’ बनाया जाए। इसके तहत कूलिंग शेल्टर बनाने और शहरी गलियारों को हरा-भरा करने पर तुरंत काम शुरू करना होगा।
