Gujarat News: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले गुजरात के सूरत से एक अभूतपूर्व राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। सूरत के उधना रेलवे स्टेशन से भाजपा ‘वोटर्स स्पेशल’ ट्रेनें चला रही है। इन ट्रेनों के जरिए करीब 5000 बंगाली प्रवासी मजदूरों को वोट डालने के लिए उनके गृह राज्य बंगाल भेजा जा रहा है। स्टेशन पर ‘जय श्री राम’ और ‘वंदे मातरम’ के नारों के साथ भारी भीड़ उमड़ी। इस विशाल राजनीतिक लामबंदी ने चुनाव विश्लेषकों को हैरान कर दिया है। वहीं टीएमसी ने इसे आचार संहिता का उल्लंघन बताया है।
मजदूरों की घर वापसी और भाजपा का प्लान
सूरत के उधना रेलवे स्टेशन पर आमतौर पर केवल मजदूरों की भीड़ रहती है। लेकिन अब यहां का नजारा पूरी तरह बदल गया है। स्टेशन पर तिरंगे लहराते हुए बंगाली मतदाता अपनी स्पेशल ट्रेनों का इंतजार कर रहे हैं। भाजपा की सूरत इकाई ने यह पूरी योजना तैयार की है। सूरत में करीब 2.5 लाख बंगाली मजदूर रहते हैं जो हीरा और कपड़ा उद्योग में काम करते हैं। काम के दबाव और महंगे टिकट के कारण ये लोग सालों से वोट नहीं डाल पा रहे थे।
फ्री टिकट और भोजन के साथ ‘वोटर्स स्पेशल’ ट्रेनें
भाजपा ने महीनों पहले से इन प्रवासी वोटरों की सूची तैयार कर ली थी। सभी की वोटर आईडी का गहराई से सत्यापन किया गया। पहली ट्रेन में करीब 1300 असली मतदाता रवाना हुए। कुल चार ट्रेनों के माध्यम से 5000 लोगों को भेजा जाएगा। इन सभी यात्रियों का टिकट, भोजन और पानी का खर्च पार्टी खुद उठा रही है। पहली खेप 18 से 20 अप्रैल के बीच रवाना हुई है, और बाकी ट्रेनें 24 अप्रैल को निकलेंगी। ये ट्रेनें सीधे कोलकाता पहुंचेंगी।
टीएमसी की चुनाव आयोग से सख्त शिकायत
इस अभूतपूर्व रणनीति पर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने कड़ी आपत्ति जताई है। टीएमसी ने इसे चुनाव आचार संहिता का खुला उल्लंघन करार दिया है। टीएमसी नेताओं का आरोप है कि मतदाताओं को मुफ्त यात्रा करवाकर सीधे तौर पर वोट खरीदे जा रहे हैं। उन्होंने चुनाव आयोग से तुरंत सख्त कार्रवाई की मांग की है। इसके जवाब में भाजपा का तर्क है कि वे केवल यात्रा की सुविधा दे रहे हैं। भाजपा नेताओं का कहना है कि मतदान गुप्त होता है और लोग अपनी मर्जी से वोट करेंगे।
बंगाल की राजनीति में ‘सूरत प्लान’ का असर
पश्चिम बंगाल में 294 विधानसभा सीटें हैं। कई सीटों पर हार-जीत का अंतर महज कुछ हजार वोटों का होता है। ऐसे में सूरत से जा रहे ये 5000 मतदाता चुनाव नतीजे पलटने की ताकत रखते हैं। भाजपा ने बंगाल में भी इन मतदाताओं के स्वागत और मतदान केंद्र तक ले जाने की पूरी व्यवस्था की है। 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को मतदान के चरण हैं। इस ‘सूरत प्लान’ ने बंगाल की चुनावी तपिश को और बढ़ा दिया है। अब देखना यह है कि ये वोटर्स किसे फायदा पहुंचाएंगे।
