Business News: सोने और चांदी में निवेश करने वालों के लिए यह हफ्ता बहुत अहम है। मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव और अमेरिका के आर्थिक आंकड़े बाजार की दिशा तय करेंगे। निवेशकों के मन में सवाल है कि क्या सोने-चांदी की कीमतों में तेजी जारी रहेगी या कोई बड़ी गिरावट आएगी। ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे कूटनीतिक विवाद से सर्राफा बाजार में भारी बेचैनी देखने को मिल रही है।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य विवाद ने बढ़ाई बाजार की अनिश्चितता
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार सर्राफा बाजार का भविष्य ईरान और अमेरिका के संघर्ष पर निर्भर है। ईरान ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर लगातार विरोधाभासी बयान दिए हैं। ईरान ने पहले इस व्यापारिक जलमार्ग को खोलने की बात कही। बाद में अमेरिकी नाकेबंदी के जवाब में ईरान ने फिर से पाबंदियां लगा दीं। यह स्थिति भारत के लिए भी चिंताजनक है। विदेश मंत्रालय ने ईरानी राजदूत को बुलाकर कड़ा विरोध जताया है। ईरानी गोलीबारी के कारण कच्चे तेल वाले दो भारतीय जहाजों को अपना मार्ग बदलना पड़ा है।
सुरक्षित निवेश के रूप में सोने और चांदी की बढ़ी मांग
जेएम फाइनेंशियल के प्रणव मेर के अनुसार कीमती धातुओं के लिए यह सप्ताह काफी निर्णायक है। निवेशकों की नजर जापान और ब्रिटेन के महंगाई आंकड़ों पर है। चीन की मौद्रिक नीति भी अहम भूमिका निभाएगी। पिछले एक महीने से वैश्विक अस्थिरता के कारण सोने-चांदी की मांग तेजी से बढ़ी है। डॉलर की कमजोरी ने भी इस मार्केट को मजबूत किया है। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की बदलती ईरान नीति ने सर्राफा बाजार में भारी उतार-चढ़ाव की स्थिति पैदा कर दी है।
घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार में रिकॉर्ड तोड़ छलांग
बीते हफ्ते घरेलू कमोडिटी बाजार में सोने और चांदी ने जबरदस्त छलांग लगाई है। चांदी की कीमतों में 5.7 प्रतिशत का भारी उछाल आया है। इसके बाद चांदी 2.57 लाख रुपए प्रति किलो पर बंद हुई। सोने के दाम 1.3 प्रतिशत बढ़कर 1.54 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गए हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार कोमैक्स पर भी कीमती धातुओं में तेजी का रुख रहा। वहां चांदी करीब 81.84 डॉलर और सोना 4,879 डॉलर प्रति औंस के शानदार स्तर पर रहा।
बाजार की चाल तय करने वाले पांच मुख्य कारण
आने वाले दिनों में बाजार की चाल मुख्य रूप से इन कारणों पर निर्भर करेगी:
- अमेरिका और ईरान के बीच 22 अप्रैल को सीजफायर की मियाद खत्म हो रही है।
- अमेरिकी रिटेल सेल्स और हाउसिंग आंकड़े आगे डॉलर की दिशा तय करेंगे।
- फेड रिजर्व चेयरमैन केविन वॉर्श का नरम रुख सोने को बहुत सहारा देगा।
- भारी बिकवाली के बाद निवेशक दोबारा गोल्ड-सिल्वर ईटीएफ की ओर लौट रहे हैं।
- चांदी को औद्योगिक मांग और सप्लाई की कमी का मजबूत सपोर्ट मिल रहा है।
निवेशकों के सामने करो या मरो की विकट स्थिति
चॉइस ब्रोकिंग फर्म के अनुसार अभी बाजार में भ्रम का भारी माहौल है। इजराइल और लेबनान के बीच दस दिनों के संघर्ष विराम से थोड़ी राहत जरूर मिली है। लेकिन ईरान पर अमेरिकी नौसैनिक घेराबंदी के बरकरार रहने तक बाजार में अस्थिरता बनी रहेगी। इन भू-राजनीतिक घटनाओं के कारण निवेशकों के सामने अब करो या मरो की स्थिति पैदा हो गई है। विशेषज्ञों ने निवेशकों को बाजार में नया पैसा लगाने से पहले विशेष सावधानी बरतने की सख्त सलाह दी है।
