New Delhi News: नेशनल हेराल्ड केस में आज दिल्ली उच्च न्यायालय में अहम सुनवाई हो रही है। ईडी की याचिका पर अदालत में दलीलें पेश होंगी। जांच एजेंसी ने निचली अदालत के एक आदेश को चुनौती दी है। इस आदेश में अदालत ने सोनिया और राहुल गांधी के खिलाफ शिकायत पर संज्ञान लेने से मना कर दिया था। यह मामला कथित धन शोधन से जुड़ा है। ईडी अब मामले को फिर से शुरू करने की मांग कर रही है।
न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच करेगी सुनवाई
यह अहम मामला न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है। इससे पहले बाइस दिसंबर को उच्च न्यायालय ने गांधी परिवार और अन्य आरोपियों को नोटिस जारी किया था। यह नोटिस मुख्य याचिका और ईडी के एक अन्य आवेदन पर आधारित था। ईडी ने सोलह दिसंबर के निचली अदालत के आदेश पर तुरंत रोक लगाने की मांग की थी। निचली अदालत ने कहा था कि बिना प्राथमिकी के शिकायत पर संज्ञान लेना कानूनी तौर पर अस्वीकार्य है।
दो हजार करोड़ की संपत्ति हड़पने का है आरोप
ईडी ने कांग्रेस नेताओं पर साजिश रचने और धन शोधन करने का गंभीर आरोप लगाया है। इनमें सोनिया और राहुल के अलावा सुमन दुबे, सैम पित्रोदा और निजी कंपनी यंग इंडियन शामिल हैं। आरोप है कि इन्होंने एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड की दो हजार करोड़ रुपये की संपत्ति हासिल की। गांधी परिवार के पास यंग इंडियन कंपनी के छिहत्तर प्रतिशत शेयर थे। इस कंपनी ने नब्बे करोड़ रुपये के लोन के बदले में एजेएल की संपत्तियों पर कब्जा कर लिया था।
सॉलिसिटर जनरल ने अदालत में पेश की अपनी दलीलें
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने उन्नीस फरवरी को ईडी की तरफ से अपनी दलीलें पेश कीं। उन्होंने कहा कि यह सीधे तौर पर कानून से जुड़ा एक अहम सवाल है। निचली अदालत का संज्ञान लेने से इनकार करना बिल्कुल गलत और विपरीत फैसला है। उन्होंने तर्क दिया कि मामले में बहस कानून के आधार पर होनी चाहिए न कि सिर्फ तथ्यों पर। निचली अदालत के इस फैसले से धन शोधन के अन्य मामलों की जांच में बाधाएं आ रही हैं।
निचली अदालत ने दिया था एफआईआर न होने का तर्क
निचली अदालत ने अपने पुराने आदेश में एक बड़ा कानूनी तर्क दिया था। अदालत का कहना था कि इस पूरे मामले में पहले कोई एफआईआर दर्ज नहीं हुई है। धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत किसी भी अपराध के लिए एफआईआर होना बहुत जरूरी है। बिना एफआईआर के धन शोधन के मामले में जांच करना पूरी तरह से अनुचित है। इसी आधार पर अदालत ने ईडी की अभियोजन शिकायत को बनाए रखने से साफ तौर पर इनकार किया था।
