Washington News: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अब बहुत खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की राजनीतिक मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से अमेरिका में पेट्रोल के दाम आसमान छू रहे हैं। इन बिगड़ते हालातों ने ट्रंप की नींद पूरी तरह उड़ा दी है। उन्हें अब अपना भविष्य भारी खतरे में नजर आ रहा है। ट्रंप को बहुत डर है कि कहीं उनका भी हाल पूर्व राष्ट्रपति जिमी कार्टर जैसा न हो जाए।
जिमी कार्टर जैसी राजनीतिक विफलता का सता रहा भारी डर
पूर्व राष्ट्रपति जिमी कार्टर को ईरान बंधक संकट ने राजनीतिक रूप से तबाह कर दिया था। अब डोनाल्ड ट्रंप को भी बिल्कुल वैसा ही डर सताने लगा है। साल उन्नीस सौ अस्सी में कार्टर तेल संकट के कारण चुनाव हार गए थे। ट्रंप के कार्यकाल में भी महंगाई और तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। अमेरिकी जनता गैस स्टेशनों पर भारी कीमतें चुका रही है। इससे देश के भीतर ट्रंप सरकार के खिलाफ लोगों का भारी गुस्सा लगातार भड़क रहा है।
होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से दुनिया में मची आर्थिक त्राहिमाम
खाड़ी क्षेत्र में होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के तेल व्यापार का सबसे अहम रास्ता है। ईरान और अमेरिका के सैन्य तनाव के कारण यह जलमार्ग पूरी तरह ठप पड़ गया है। व्यापारिक जहाजों की आवाजाही रुकने से वैश्विक सप्लाई चेन बुरी तरह चरमरा गई है। इसका सबसे सीधा असर अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। पेट्रोल और डीजल की कमी से महंगाई ने सभी पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। अर्थशास्त्री जल्द ही एक भयानक वैश्विक मंदी आने की गंभीर चेतावनी दे रहे हैं।
अमेरिकी चुनाव से पहले ट्रंप की घटी भारी लोकप्रियता
आगामी चुनावों से पहले यह नया संकट ट्रंप के लिए बहुत बड़ा राजनीतिक झटका है। घरेलू मोर्चे पर भारी महंगाई उनके चुनाव प्रचार को लगातार कमजोर कर रही है। विपक्षी पार्टियां तेल संकट को लेकर ट्रंप की नीतियों पर कड़े सवाल उठा रही हैं। राष्ट्रपति को समझ नहीं आ रहा है कि वह इस मुसीबत से कैसे निपटें। अगर जल्द कोई ठोस समाधान नहीं निकला, तो ट्रंप को सत्ता से हाथ धोना पड़ सकता है। हालात उनके नियंत्रण से पूरी तरह बाहर जा रहे हैं।
ईरान को बातचीत के लिए मनाने के चल रहे गुप्त प्रयास
व्हाइट हाउस के अधिकारी अब पर्दे के पीछे से इस मामले को शांत करने में जुटे हैं। कूटनीतिक चैनलों के जरिए ईरान से संपर्क साधने की लगातार भारी कोशिश की जा रही है। अमेरिका चाहता है कि जल्द ही तेल का प्रवाह फिर से शुरू हो जाए। ट्रंप प्रशासन मध्य पूर्व के अन्य सहयोगी देशों से मदद मांग रहा है। दुनिया भर की नजरें अब अमेरिका के अगले कदम पर टिकी हैं। शांति के लिए यह समय बेहद नाजुक बना हुआ है।
