ईरान में महासंकट: क्या अली खामेनेई की मौत के बाद दफनाने से डर रहे हैं अधिकारी? जानें पर्दे के पीछे का सच

Iran News: ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन की खबरों और उनके अंतिम संस्कार को लेकर वैश्विक मीडिया में अटकलों का बाजार गर्म है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान के वरिष्ठ अधिकारी और सुरक्षा एजेंसियां उनके शव को दफनाने के फैसले को लेकर गहरी चिंता और भय में हैं। दावा किया जा रहा है कि सुरक्षा कारणों और संभावित जन-आक्रोश के डर से प्रशासन किसी भी सार्वजनिक कार्यक्रम से बच रहा है। इस स्थिति ने मध्य पूर्व के इस शक्तिशाली देश में एक बड़े राजनीतिक शून्य और अनिश्चितता का संकेत दिया है।

सत्ता के गलियारों में सन्नाटा और खौफ

ईरान के भीतर से आ रही खबरें बताती हैं कि खामेनेई की कथित मौत के हफ्तों बाद भी कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं हुआ है। उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, देश के शीर्ष नेतृत्व के बीच उत्तराधिकार की जंग शुरू हो गई है। अधिकारियों को डर है कि यदि मौत की पुष्टि हुई, तो इजरायल या अन्य विरोधी ताकतें इस कमजोरी का फायदा उठा सकती हैं। सुरक्षा तंत्र को अंदेशा है कि अंतिम संस्कार के दौरान विदेशी हमले या आंतरिक विद्रोह की स्थिति पैदा हो सकती है, जिससे पूरी शासन व्यवस्था ध्वस्त हो सकती है।

सुरक्षा चिंताओं ने रोका अंतिम संस्कार

खामेनेई के अंतिम संस्कार में देरी का सबसे बड़ा कारण सुरक्षा जोखिम बताया जा रहा है। ईरानी खुफिया एजेंसियों को इनपुट मिले हैं कि उनके दफन स्थल को विरोधियों द्वारा निशाना बनाया जा सकता है। साथ ही, हिजबुल्लाह और हमास जैसे सहयोगी संगठनों के कमजोर पड़ने से ईरान खुद को अकेला महसूस कर रहा है। अधिकारी इस बात पर विचार कर रहे हैं कि क्या दफन की प्रक्रिया को गुप्त रखा जाए। यह हिचकिचाहट दिखाती है कि वर्तमान सरकार जनता और अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच किस कदर फंसी हुई है।

कौन होगा ईरान का अगला सर्वोच्च नेता?

अली खामेनेई के बाद ईरान की कमान किसके हाथ में होगी, यह सवाल पूरी दुनिया को परेशान कर रहा है। चर्चा है कि उनके बेटे मोजतबा खामेनेई रेस में सबसे आगे हैं, लेकिन उन पर वंशवाद के आरोप लग रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सेना यानी इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) इस प्रक्रिया में निर्णायक भूमिका निभाएगी। जब तक नाम तय नहीं होता, तब तक मौत की खबर को दबाए रखना अधिकारियों की मजबूरी बन गया है। इस देरी ने आम जनता के बीच भी संदेह और घबराहट पैदा कर दी है।

मध्य पूर्व के समीकरणों पर गहरा असर

ईरान में राजनीतिक अस्थिरता का सीधा असर लेबनान, सीरिया और यमन जैसे देशों पर पड़ेगा। खामेनेई के नेतृत्व में ईरान ने एक मजबूत ‘एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस’ तैयार किया था, जो अब खतरे में है। इजरायल के साथ बढ़ते तनाव और अमेरिका की सख्त निगरानी के बीच ईरान का यह घटनाक्रम बेहद संवेदनशील है। यदि प्रशासन जल्द ही स्थिति स्पष्ट नहीं करता, तो देश के भीतर गृहयुद्ध जैसी स्थिति बन सकती है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें तेहरान के आधिकारिक रेडियो और टीवी चैनलों पर टिकी हुई हैं।

SOURCE: न्यूज एजेंसी
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