Gujarat News: गुजरात हाईकोर्ट ने एक भूमि विवाद मामले की सुनवाई के दौरान भरूच कलेक्टर के प्रति कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने अधिकारी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए उन्हें ‘अनपढ़’ तक कह दिया। जस्टिस संगीता विशेन की पीठ ने यह टिप्पणी कलेक्टर द्वारा पारित एक आदेश को लेकर की। अदालत का मानना था कि अधिकारी ने कानूनी प्रावधानों और पिछले अदालती आदेशों की पूरी तरह अनदेखी की है। यह मामला एक कृषि भूमि के गैर-कृषि (NA) उपयोग की अनुमति से जुड़ा था।
कानूनी समझ पर हाईकोर्ट के कड़े तेवर
सुनवाई के दौरान जस्टिस संगीता विशेन ने कलेक्टर के आदेश की भाषा और तर्क पर हैरानी जताई। अदालत ने कहा कि एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी से इस तरह के लापरवाह रवैये की उम्मीद नहीं की जा सकती। जज ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसा लगता है जैसे आदेश लिखने वाला व्यक्ति कानूनी रूप से साक्षर नहीं है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अधिकारी बार-बार एक ही गलती दोहरा रहे हैं। इससे अदालती समय की बर्बादी होती है और आम नागरिकों को परेशानी झेलनी पड़ती है।
जमीन विवाद और कलेक्टर का विवादित फैसला
पूरा विवाद भरूच जिले की एक जमीन को लेकर शुरू हुआ था। याचिकाकर्ता ने अपनी भूमि को गैर-कृषि उपयोग में बदलने के लिए आवेदन किया था। कलेक्टर कार्यालय ने इस आवेदन को बार-बार तकनीकी आधार पर खारिज कर दिया। याचिकाकर्ता का आरोप है कि हाईकोर्ट के पिछले निर्देशों के बावजूद कलेक्टर ने पुराने ही आधारों पर नया नकारात्मक आदेश जारी कर दिया। इसी जिद और कानून की गलत व्याख्या को देखकर हाईकोर्ट ने अपनी सख्त नाराजगी जाहिर की और फटकार लगाई।
प्रशासनिक अधिकारियों की जवाबदेही पर सवाल
अदालत ने इस मामले में प्रशासनिक जवाबदेही का मुद्दा भी उठाया है। हाईकोर्ट ने कहा कि अगर अधिकारी अदालती आदेशों को समझने में विफल रहते हैं, तो यह गंभीर चिंता का विषय है। जस्टिस विशेन ने चेतावनी दी कि यदि कार्यशैली में सुधार नहीं हुआ, तो सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। कोर्ट ने सरकारी वकील को भी निर्देश दिया कि वे संबंधित अधिकारी को कानून की मर्यादा समझाएं। इस टिप्पणी के बाद प्रशासनिक हलकों में काफी हलचल देखी जा रही है और अधिकारी अब बचाव की मुद्रा में हैं।
अदालत ने कलेक्टर से मांगा जवाब
हाईकोर्ट ने फिलहाल इस मामले में कलेक्टर के आदेश पर सवाल खड़े करते हुए उनसे स्पष्टीकरण मांगा है। अदालत ने याचिकाकर्ता को राहत देने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए मामले की अगली सुनवाई तय कर दी है। कोर्ट ने साफ किया कि वह सरकारी अधिकारियों की मनमानी को बर्दाश्त नहीं करेगा। विशेष रूप से जब मामला सीधे तौर पर आम जनता के मौलिक अधिकारों और संपत्ति से जुड़ा हो। अब सबकी नजरें प्रशासन के अगले कदम और हाईकोर्ट के अंतिम फैसले पर टिकी हुई हैं।
