Iran News: अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत को लेकर भारी अनिश्चितता बनी हुई है। ईरानी उप विदेश मंत्री ने इस मुद्दे पर अपना स्पष्ट रुख रखा है। उन्होंने बताया कि दूसरे दौर की वार्ता के लिए कोई तारीख तय नहीं है। ईरानी संसद के स्पीकर ने भी अमेरिका पर अपना अविश्वास जताया है। उन्होंने कहा कि उन्हें दुश्मन देश अमेरिका पर बिल्कुल भरोसा नहीं है। उनकी सेनाएं किसी भी सैन्य चुनौती का सामना करने के लिए मुस्तैद हैं।
अमेरिकी मांगों को लेकर ईरान ने अपनाया सख्त कूटनीतिक रुख
ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे कूटनीतिक तनाव के बीच हलचल काफी तेज है। ईरानी उप विदेश मंत्री सईद खातिबजादेह ने वर्तमान स्थिति पर अपना बयान जारी किया है। उन्होंने बताया कि दूसरे चरण की बातचीत के लिए कोई विशेष योजना नहीं बनी है। अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार ईरान ने अपना सख्त रुख दिखाया है। अगर अमेरिका फिर से कोई अतिवादी मांग रखता है तो उसे स्वीकार नहीं किया जाएगा।
किसी भी सैन्य चुनौती के लिए ईरानी सशस्त्र बल तैयार
ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबफ ने राष्ट्रीय सुरक्षा पर सख्त टिप्पणी की है। उन्होंने प्रेस टीवी को बताया कि दुश्मन पर भरोसा करना सबसे बड़ी भूल होगी। कूटनीतिक स्तर पर बातचीत होने के बावजूद अचानक युद्ध छिड़ने की पूरी संभावना है। देश के सशस्त्र बल जमीनी स्तर पर हर सैन्य चुनौती का सामना करने के लिए तैयार हैं। बातचीत से सेना की युद्ध तैयारियों पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
इस्लामाबाद में प्रस्तावित शांति वार्ता को लेकर सस्पेंस कायम
मीडिया रिपोर्ट्स में दोनों देशों की शांति वार्ता को लेकर कई दावे सामने आए थे। पाकिस्तानी चैनल ने दावा किया था कि अगले सप्ताहांत इस्लामाबाद में बातचीत हो सकती है। हालांकि मौजूदा परिस्थितियों को देखकर इस संभावना को अब खारिज कर दिया गया है। रविवार तक इस दिशा में कूटनीतिक स्तर पर कोई सकारात्मक संकेत नहीं मिला है। विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के बीच बातचीत होने की उम्मीद नहीं बची है।
जलमार्ग विवाद पर यूरोपीय संघ की अपील को तेहरान ने नकारा
ईरान और पश्चिमी देशों के बीच समुद्री व्यापारिक मार्ग को लेकर गहरा विवाद चल रहा है। ईरानी विदेश मंत्रालय ने यूरोपीय संघ की एक नई अपील को सिरे से खारिज कर दिया है। यूरोपीय संघ ने होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों के टोल-मुक्त आवागमन की मांग रखी थी। ईरान ने इस अंतरराष्ट्रीय मांग को खुले तौर पर चरम पाखंड करार दिया है। अमेरिकी नाकाबंदी के कारण तेहरान ने पश्चिमी देशों के खिलाफ यह आक्रामक रुख अपनाया है।
हमलों के बाद से दोनों देशों के बीच कूटनीतिक प्रयास विफल
फरवरी में अमेरिका और इजरायल ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर कई बड़े हमले किए थे। इन भीषण सैन्य हमलों में तीन हजार से ज्यादा लोगों की जान गई थी। इसके बाद अप्रैल की शुरुआत में वाशिंगटन और तेहरान ने युद्धविराम की घोषणा की थी। युद्धविराम के बाद इस्लामाबाद में हुई पहले दौर की बातचीत पूरी तरह बेनतीजा रही थी। अब तनाव कम करने के लिए मध्यस्थ देश नए सिरे से शांति वार्ता का प्रयास कर रहे हैं।
