World News: अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव शनिवार को चरम पर पहुंच गया। ईरान ने इस अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग को तुरंत प्रभाव से बंद करने की घोषणा कर दी। ईरानी नौसेना ने दो जहाजों पर गोलीबारी की, जिनमें एक भारतीय झंडे वाला टैंकर भी शामिल बताया जा रहा है। इससे पहले शुक्रवार को ही ईरान ने जलमार्ग खोलने की बात कही थी।
ईरान का सख्त रुख, अमेरिका को चेतावनी
ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बगेर गालिबफ ने साफ कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य तेहरान के पूर्ण नियंत्रण में है। उन्होंने अमेरिका को चेतावनी दी कि अगर ईरानी बंदरगाहों पर नाकाबंदी जारी रही तो यह जलमार्ग पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा। गालिबफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि जहाजों का आवागमन केवल ईरान की अनुमति पर निर्भर करेगा। नियंत्रण क्षेत्रीय स्थिति के आधार पर तय होगा, न कि सोशल मीडिया पोस्ट्स पर।
ईरानी इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने भी यह घोषणा की। आईआरजीसी ने कहा कि अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों और जहाजों पर नाकाबंदी लगा रखी है। इसे युद्धविराम का उल्लंघन मानते हुए जलडमरूमध्य को पिछली स्थिति में लाया गया है। अब यह ईरानी सशस्त्र बलों के सख्त नियंत्रण में होगा।
गोलीबारी की घटना, भारतीय टैंकर भी निशाने पर
समाचार एजेंसियों और शिपिंग संगठनों के मुताबिक, शनिवार को होर्मुज से गुजरने की कोशिश कर रहे दो जहाजों पर ईरानी गनबोट्स ने गोलीबारी की। इनमें एक भारतीय झंडे वाला टैंकर भी शामिल बताया जा रहा है। गोलीबारी के बाद कई व्यावसायिक जहाजों ने अपना मार्ग बदल लिया। कुछ जहाज वापस लौट गए।
यह घटना बेहद अहम है क्योंकि शुक्रवार को ईरान ने जलडमरूमध्य को व्यावसायिक जहाजों के लिए पूरी तरह खोलने की घोषणा की थी। उस घोषणा के बाद वैश्विक तेल कीमतों में तेज गिरावट आई थी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी दावा किया था कि होर्मुज बिजनेस के लिए पूरी तरह खुला है।
ईरान ने अमेरिकी प्रस्तावों पर शुरू की समीक्षा
ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने शनिवार को बताया कि देश अमेरिका के नए प्रस्तावों की समीक्षा कर रहा है। राज्य मीडिया के अनुसार, पाकिस्तानी सेना के कमांडर की मध्यस्थता में अमेरिका ने ये प्रस्ताव रखे हैं। ईरान ने अभी तक इन पर कोई जवाब नहीं दिया है।
परिषद ने साफ कहा कि ईरान का वार्ता प्रतिनिधिमंडल किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगा। न तो वह पीछे हटेगा और न ही कोई नरमी बरतेगा। प्रतिनिधिमंडल ईरानी राष्ट्र के हितों की पूरी ताकत से रक्षा करेगा। पाकिस्तान इन दोनों देशों के बीच मुख्य मध्यस्थ के रूप में उभरा है। उसने पिछले सप्ताह वार्ता के प्रारंभिक दौर की मेजबानी की थी, जो बिना किसी समझौते के समाप्त हो गई थी।
50 दिन से जारी तनाव, समाधान के आसार नहीं
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव शुरू हुए 50 दिन से अधिक हो चुके हैं। अब तक समाधान की कोई ओर-छोर नजर नहीं आ रही है। ईरान ने कहा कि अमेरिका बार-बार भरोसा तोड़ रहा है। इसी वजह से होर्मुज और ओमान सागर में जहाजों के आवागमन पर प्रतिबंध लगाया जा रहा है। ईरानी बंदरगाहों पर लगी अमेरिकी नाकाबंदी जारी रहेगी। ईरान ने यह भी कहा कि वह अपने हितों के लिए कोई समझौता नहीं करेगा। अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस बढ़ते तनाव पर चिंता जता रहा है।
