लोकसभा में बिल गिरने के बाद प्रियंका गांधी का मोदी सरकार को खुला चैलेंज, जानें क्या है विपक्ष का ‘प्लान बी’?

India News: लोकसभा में संविधान संशोधन विधेयक गिरने के बाद सियासत गरमाई। कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने मोदी सरकार को सीधी चुनौती दी है। उन्होंने सोमवार को संसद बुलाकर पुराना बिल पेश करने की मांग रखी। यह पुराना बिल नारी शक्ति वंदन अधिनियम है। साल दो हजार तेईस में सभी दलों ने इसे समर्थन दिया था। इसमें महिलाओं के लिए तैंतीस फीसदी आरक्षण का स्पष्ट प्रावधान है। विपक्ष पर महिला विरोधी होने का आरोप पूरी तरह से गलत है।

संघीय ढांचे को बदलने की गहरी साजिश

प्रियंका गांधी ने शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि यह नया बिल संघीय ढांचे को बदलने की साजिश था। लोकसभा में इस बिल का गिरना हमारे लोकतंत्र की बहुत बड़ी जीत है। सरकार ने लोकतंत्र को कमजोर करने का एक बड़ा षड्यंत्र रचा था। विपक्ष ने पूरी एकजुटता के साथ इसे सफलतापूर्वक विफल कर दिया है। यह जीत सीधे तौर पर देश के संविधान और आम जनता की है।

परिसीमन के जरिए सरकार की मनमानी का आरोप

कांग्रेस महासचिव ने इस नए बिल की असली राजनीतिक मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि सरकार परिसीमन के जरिए मनमानी करना चाहती थी। सरकार जातिगत जनगणना के मुश्किल आंकड़ों से पूरी तरह बचना चाहती थी। सत्ता हासिल करने के लिए महिलाओं का केवल एक उपकरण की तरह इस्तेमाल हुआ। यह नया बिल महिला आरक्षण से ज्यादा परिसीमन के अहम मुद्दे से जुड़ा था। एकजुट विपक्ष ने सरकार की इस चाल को सदन में नाकाम कर दिया।

भाजपा खुद को साबित करना चाहती थी मसीहा

प्रियंका ने कहा कि सरकार खुद को महिलाओं का मसीहा साबित करना चाहती थी। इनकी रणनीति बिल्कुल साफ थी। पास होने पर श्रेय लेते और गिरने पर विपक्ष को दोषी ठहराते। प्रियंका ने हाथरस और महिला पहलवानों के मामलों की तुरंत याद दिलाई। उन्होंने स्पष्ट किया कि भाजपा का इतिहास सबके सामने मौजूद है। महिलाएं सरकार के पीआर अभियान को अच्छी तरह समझ चुकी हैं। अब आम जनता का भरोसा इस सरकार से पूरी तरह उठ चुका है।

ओबीसी महिलाओं के लिए अलग कोटे की मांग

विपक्ष ने ओबीसी महिलाओं के लिए अलग आरक्षण की मजबूत मांग उठाई है। प्रियंका गांधी ने कहा कि नया महिला आरक्षण बिल पूरी तरह अधूरा है। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की महिलाओं के लिए पहले से आरक्षण है। उसी तर्ज पर अन्य पिछड़ा वर्ग की महिलाओं के लिए आरक्षण होना चाहिए। जनसंख्या के सटीक अनुपात में ओबीसी महिलाओं को उनका पूरा हक मिलना चाहिए। कांग्रेस इस अहम मुद्दे पर पूरी मजबूती के साथ आवाज उठा रही है।

संसद में आखिर शुक्रवार को क्या हुआ था?

लोकसभा में शुक्रवार को संविधान का नया संशोधन विधेयक पेश किया गया था। यह खास बिल महिलाओं को तैंतीस प्रतिशत आरक्षण देने से जुड़ा था। बिल को पास करने के लिए दो तिहाई बहुमत की सख्त जरूरत थी। मतदान के दौरान इसके पक्ष में 298 वोट पड़े और 230 सदस्यों ने विरोध किया। पर्याप्त बहुमत न मिलने के कारण यह बिल संसद में तुरंत गिर गया। इसके साथ ही परिसीमन और संघ राज्य विधि संशोधन विधेयक भी अटक गए।

SOURCE: न्यूज एजेंसी
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