Himachal News: हिमाचल प्रदेश के सोलन में चेस्टर हिल रियल एस्टेट प्रोजेक्ट का विवाद लगातार गहराता जा रहा है। बेनामी संपत्ति और धारा 118 के उल्लंघन मामले में महालेखाकार कार्यालय की टीम ने अचानक सोलन तहसील में दबिश दी। इस अप्रत्याशित छापेमारी से पूरे तहसील परिसर में भारी हड़कंप मच गया। टीम ने कई घंटों तक सेल डीड और स्टाम्प ड्यूटी से जुड़े अहम दस्तावेज खंगाले। किसान सभा ने भी परियोजना पर ग्रामीणों को डराने और अवैध डंपिंग के गंभीर आरोप लगाए हैं।
तहसील कार्यालय में सात घंटे तक चली सघन जांच
महालेखाकार कार्यालय की विशेष टीम शुक्रवार सुबह अचानक सोलन तहसील पहुंची। टीम सीधे तहसीलदार के कार्यालय गई और जांच शुरू कर दी। अधिकारियों ने चेस्टर हिल प्रोजेक्ट की सभी सेल डीड कब्जे में ले लीं। उन्होंने स्टाम्प ड्यूटी और जमीन की कीमत का बारीकी से मिलान किया। करीब साढ़े सात घंटे की लंबी छानबीन के बाद शाम पांच बजे टीम बाहर आई। अधिकारी अपने साथ कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जांच के लिए ले गए हैं। इस कार्रवाई से हड़कंप मचा है।
एक ही कृषक के नाम पर खरीदी गई सैकड़ों बीघा जमीन
जांच टीम ने संदिग्ध किसानों की जमीन खरीद का पूरा रिकॉर्ड तलब किया है। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि प्रोजेक्ट में एक ही व्यक्ति के नाम पर सैकड़ों बीघा जमीन खरीदी गई है। इस शख्स ने सोलन और परवाणू में भारी निवेश किया है। उसने अपनी पत्नी और दो बहनों के नाम पर भी बेशकीमती संपत्तियां जुटाई हैं। महालेखाकार की टीम अब इस बड़े जमीन घोटाले के पीछे छिपे असली रसूखदारों की गहनता से तलाश कर रही है।
जमीन बेचने के लिए ग्रामीणों पर डाला जा रहा भारी दबाव
किसान सभा के प्रतिनिधिमंडल ने सोलन के उपायुक्त से मुलाकात कर चिंताएं जाहिर की हैं। उन्होंने पंचायत पड़ग और आसपास के गांवों की गंभीर समस्याएं प्रमुखता से उठाई हैं। नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रोजेक्ट प्रबंधन ग्रामीणों पर जमीन बेचने का भारी दबाव बना रहा है। लोगों को जमीन लीज पर देने के लिए मजबूर किया जा रहा है। उन्होंने सरकारी नालों में अवैध डंपिंग तुरंत रोकने की मांग रखी है। उपायुक्त ने जल्द सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया है।
