14 लाख के कर्ज पर ‘स्त्रीधन’ और ‘इश्क’ का बहाना, मंडी कोर्ट ने पिता-पुत्री को ऐसे सिखाया सबक!

Himachal News: हिमाचल प्रदेश की मंडी जिला अदालत ने 14 लाख रुपये की रिकवरी से जुड़े एक दिलचस्प मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने पिता-पुत्री की अपील को सिरे से खारिज करते हुए निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखा है। प्रतिवादी यह साबित करने में पूरी तरह नाकाम रहे कि यह बड़ी रकम शादी के तोहफे या ‘स्त्रीधन’ के तौर पर दी गई थी। इस फैसले ने स्पष्ट कर दिया है कि चेक के जरिए ली गई राशि को व्यक्तिगत संबंधों की आड़ में डकारा नहीं जा सकता।

बिजनेस में घाटे की दुहाई देकर लिया था लाखों का कर्ज

यह कानूनी विवाद साल 2012 में शुरू हुआ था। पंडोह के रहने वाले हाइड्रो प्रोजेक्ट ठेकेदार सतपाल ने रोहड़ू के विनय सूद और उनकी बेटी कविता सूद के खिलाफ मुकदमा किया था। सतपाल के मुताबिक सूद परिवार ने अपने हार्डवेयर कारोबार को घाटे से उबारने के लिए उनसे वित्तीय मदद मांगी थी। मानवीय संवेदनाओं के आधार पर सतपाल ने तीन अलग-अलग चेक के माध्यम से उन्हें कुल 14 लाख रुपये का ऋण दिया था। लेकिन रकम वापस मांगते ही प्रतिवादियों के सुर बदल गए।

कोर्ट ने खारिज किया प्रेम संबंधों और स्त्रीधन का दावा

खुद को बचाने के लिए कविता और उसके पिता ने अदालत में एक अजीबोगरीब दलील दी थी। उन्होंने दावा किया कि सतपाल और कविता के बीच प्रेम संबंध थे। उनके अनुसार यह 14 लाख रुपये शादी के सामान की खरीदारी के लिए ‘स्त्रीधन’ के रूप में दिए गए थे। हालांकि न्यायाधीश ने पाया कि सतपाल पहले से शादीशुदा हैं और कविता के भी दो विवाह हो चुके हैं। तलाक के कानूनी सबूत न होने के कारण अदालत ने उनके बीच किसी भी कथित विवाह की बात को पूरी तरह नकार दिया।

अपने ही बयानों के जाल में फंसी आरोपी महिला

सुनवाई के दौरान प्रतिवादियों ने अधिकार क्षेत्र का मुद्दा उठाकर केस को लटकाने की कोशिश की थी। लेकिन जिरह के दौरान कविता सूद ने खुद ही स्वीकार किया कि वह 2 जुलाई 2012 को अपने पिता के साथ सतपाल के घर पंडोह गई थी। इसी मुलाकात के दौरान सतपाल ने उन्हें चेक सौंपे थे। चूंकि लेनदेन मंडी जिले के पंडोह में हुआ था, इसलिए अदालत ने माना कि मामले की सुनवाई का पूरा अधिकार मंडी कोर्ट को ही है।

अब 12 प्रतिशत ब्याज के साथ लौटानी होगी पूरी रकम

अदालत ने प्रतिवादियों की उन तमाम आपत्तियों को खारिज कर दिया जिनमें उन्होंने ब्याज दर को चुनौती दी थी। जज ने आदेश दिया कि चूंकि यह साबित हो चुका है कि पैसा चेक के माध्यम से लिया गया और उसे बैंक में भुनाया गया, इसलिए प्रतिवादी इसे लौटाने के लिए कानूनन बाध्य हैं। अब विनय सूद और कविता सूद को 14 लाख रुपये की मूल राशि के साथ-साथ 12 फीसदी वार्षिक ब्याज भी सतपाल ठाकुर को चुकाना होगा।

SOURCE: न्यूज एजेंसी
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