Business News: भारतीय शेयर बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशकों ने लंबे समय बाद वापसी की है। विदेशी निवेशकों ने नकद बाजार में लगातार तीन दिन तक खरीदारी की है। इस दौरान बाजार में कुल 1731.71 करोड़ रुपये का निवेश आया है। यह भारतीय बाजार के लिए एक बहुत ही मजबूत संकेत है। भारी बिकवाली के बाद अब बाजार का माहौल बदलता हुआ दिख रहा है। इससे शेयर बाजार के आम निवेशकों की उम्मीदें भी बढ़ गई हैं।
विदेशी निवेशकों ने कब और कितना पैसा लगाया?
विदेशी निवेशकों ने सत्रह अप्रैल को बाजार में 683.20 करोड़ रुपये का निवेश किया है। इसके अलावा सोलह अप्रैल को 382.36 करोड़ रुपये बाजार में डाले गए। पंद्रह अप्रैल को भी उन्होंने 666.15 करोड़ रुपये की अच्छी खरीदारी की। पच्चीस फरवरी के बाद यह पहली बार है जब विदेशी निवेशक लगातार खरीदारी कर रहे हैं। इन आंकड़ों से साफ पता चलता है कि भारतीय शेयर बाजार में अब धीरे-धीरे नया पैसा आ रहा है।
साल की शुरुआत से भारी बिकवाली का दबाव
इस साल विदेशी निवेशकों ने लगातार शेयर बाजार से अपना पैसा निकाला है। अप्रैल महीने में उन्होंने 39,224.10 करोड़ रुपये की बहुत भारी बिकवाली की है। मार्च महीने में यह आंकड़ा 1,22,540.41 करोड़ रुपये तक पहुंच गया था। फरवरी में भी 6,640.78 करोड़ रुपये निकाले गए थे। जनवरी महीने में 41,435.22 करोड़ रुपये की बड़ी बिकवाली हुई थी। विदेशी निवेशकों का यह दबाव वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण ज्यादा देखा जा रहा था।
घरेलू निवेशकों का बाजार में सतर्क रुख
विदेशी निवेशकों की वापसी के बीच घरेलू संस्थागत निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया है। पिछले तीन दिनों में घरेलू निवेशक बाजार में पूरी तरह से शुद्ध विक्रेता रहे हैं। सत्रह अप्रैल को उन्होंने 4,721.48 करोड़ रुपये के शेयर बेचे हैं। सोलह अप्रैल को 3,427.75 करोड़ रुपये की बिकवाली दर्ज की गई। पंद्रह अप्रैल को भी उन्होंने 568.98 करोड़ रुपये निकाले हैं। घरेलू निवेशकों की इस रणनीति पर सभी की पैनी नजर बनी हुई है।
बाजार को कैसे मिला घरेलू निवेशकों का सहारा?
- इस साल विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली के दौरान घरेलू निवेशकों ने बाजार को संभाला है।
- अप्रैल महीने में घरेलू निवेशकों ने 29,696.62 करोड़ रुपये का बड़ा निवेश किया है।
- मार्च महीने में यह निवेश 1,42,960.37 करोड़ रुपये के सबसे ऊंचे स्तर पर था।
- फरवरी में 38,423.11 करोड़ रुपये और जनवरी में 69,220.74 करोड़ रुपये का निवेश हुआ था।
- दिसंबर में भी घरेलू निवेशकों ने 79,619.91 करोड़ रुपये की जोरदार खरीदारी की थी।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली रुकने की असली वजह
रिजर्व बैंक के सख्त कदमों ने मुद्रा बाजार में सट्टेबाजी को काफी हद तक रोका है। इसके कारण रुपये की लगातार हो रही गिरावट पर भी सीधा असर पड़ा है। तीस मार्च को रुपया 95.30 प्रति डॉलर के स्तर पर कमजोर बना हुआ था। अब सत्रह अप्रैल को यह सुधरकर 92.8 रुपये के स्तर पर मजबूती से आ गया है। रुपये की इस नई स्थिरता ने ही विदेशी निवेशकों को दोबारा बाजार में लौटने के लिए प्रेरित किया है।
कच्चे तेल की कीमतों का रुपये पर क्या असर?
- होर्मुज स्ट्रेट में हाल ही में हुई बड़ी घटनाओं का असर वैश्विक बाजार पर पड़ा है।
- इसके बावजूद ब्रेंट क्रूड की कीमतों में करीब नब्बे डॉलर तक की गिरावट देखी गई है।
- कच्चे तेल के दाम गिरने से भारत को विदेशी मुद्रा बचाने में काफी मदद मिलेगी।
- कम समय में इससे भारतीय रुपये को बाजार में और भी मजबूत सहारा मिल सकता है।
- यह स्थिति शेयर बाजार में विदेशी निवेश को आगे भी लगातार बढ़ाने में मददगार साबित होगी।
