Business News: वैश्विक तनाव और युद्ध के हालातों के बीच भारत में गहराया ऊर्जा संकट अब धीरे-धीरे खत्म हो रहा है। पिछले कुछ हफ्तों से एलपीजी (LPG) सिलेंडर की किल्लत झेल रहे उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत भरी खबर आई है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने गैस सप्लाई चेन में सुधार किया है। इससे सिलेंडर बुकिंग का वेटिंग पीरियड, जो बढ़कर 45 दिन तक पहुंच गया था, अब काफी कम हो गया है। सप्लाई में तेजी आने से अब ग्राहकों को लंबी कतारों और देरी से छुटकारा मिलेगा।
पैनिक बाइंग और होर्डिंग ने बिगाड़े थे हालात
अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते युद्ध के खतरों ने देश में गैस की भारी कमी पैदा कर दी थी। डिलीवरी में देरी के कारण खासकर छोटे शहरों में लोगों के बीच अफरा-तफरी मच गई थी। घबराए हुए उपभोक्ताओं ने पैनिक बाइंग और होर्डिंग (जमाखोरी) शुरू कर दी, जिससे संकट और गहरा गया। बड़े परिवारों के लिए रसोई का चूल्हा जलाना एक बड़ी चुनौती बन गया था। हालांकि, सरकार की सक्रियता के बाद अब बाजार में सिलेंडरों की उपलब्धता सामान्य हो रही है।
रोजाना 50 लाख सिलेंडरों की हो रही है डिलीवरी
पेट्रोलियम और नेचुरल गैस मंत्रालय की जॉइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा ने ताजा स्थिति की जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि अब रोजाना बुकिंग 4.6 से 5 मिलियन के बीच हो रही है। डिलीवरी की प्रक्रिया अब पूरी तरह पटरी पर लौट चुकी है। पिछले 16 अप्रैल को ही लगभग 5 मिलियन रिफिल सिलेंडर घरों तक पहुंचाए गए। यह आंकड़ा इस बात का प्रमाण है कि देश अब एलपीजी सप्लाई के मामले में सामान्य स्थिति की ओर मजबूती से कदम बढ़ा रहा है।
ऑनलाइन बुकिंग और वेरिफाइड डिलीवरी पर जोर
सरकार ने सप्लाई व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए डिजिटल सिस्टम का सहारा लिया है। वर्तमान में कुल डिमांड का लगभग 98% हिस्सा ऑनलाइन बुकिंग के जरिए पूरा किया जा रहा है। अवैध सप्लाई और कालाबाजारी को रोकने के लिए वेरिफाइड डिलीवरी का आंकड़ा 90% से पार कर गया है। डिस्ट्रीब्यूटर सेंटरों पर अब गैस की कोई कमी नहीं है। डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क को और मजबूत करने के लिए सरकारी तेल कंपनियां अब विशेष डिलीवरी कैंपेन चला रही हैं।
प्रवासी मजदूरों और छात्रों के लिए विशेष व्यवस्था
कमर्शियल गैस सप्लाई भी अब संकट पूर्व स्तर के लगभग 70% पर वापस आ गई है। सरकार ने उन लोगों का भी ख्याल रखा है जिनके पास नियमित गैस कनेक्शन नहीं है। 23 मार्च से अब तक लगभग 16.4 लाख छोटे 5-किलोग्राम वाले सिलेंडर मार्केट प्राइस पर बेचे गए हैं। इस कदम से खासकर प्रवासी मजदूरों, छात्रों और छोटे व्यापारियों को बड़ी मदद मिली है। मंत्रालय ने आश्वासन दिया है कि भविष्य में ऐसी किसी भी कमी को रोकने के लिए पर्याप्त स्टॉक सुरक्षित रखा गया है।
