Tehran News: अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा अस्थायी युद्धविराम समझौता समाप्त होने में अब मात्र 24 घंटे का समय शेष रह गया है। ईरानी प्रशासन की ओर से शांति वार्ता के प्रस्ताव पर अब तक कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं मिलने से व्हाइट हाउस में बेचैनी का माहौल है। सूत्रों के अनुसार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस गतिरोध को समाप्त करने के लिए अब सीधे ईरान के शीर्ष नेतृत्व से संवाद स्थापित करने पर विचार कर रहे हैं। ट्रंप किसी भी कीमत पर इस संघर्ष को विराम देना चाहते हैं ताकि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को नियंत्रित किया जा सके।
ईरान की चुप्पी से बढ़ी ट्रंप प्रशासन की बेचैनी
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान ईरान को कड़ी चेतावनी जारी की थी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि यदि ईरान बातचीत की मेज पर नहीं आता है तो उसे पहले कभी न देखी गई गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। हालांकि इस धमकी के बावजूद ईरान की ओर से अब तक कोई आधिकारिक जवाब नहीं आया है। इस चुप्पी के कारण अमेरिकी विदेश नीति विशेषज्ञों में संशय की स्थिति बनी हुई है। व्हाइट हाउस के करीबी सूत्रों का कहना है कि ट्रंप इस युद्ध को समाप्त करने के मूड में हैं।
क्या इस्लामाबाद में होगी दूसरे दौर की ऐतिहासिक वार्ता?
इस बीच अमेरिकी मीडिया नेटवर्क एक्सियोस ने अपनी एक विशेष रिपोर्ट में बड़ा दावा किया है। रिपोर्ट के अनुसार ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई ने बुधवार को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में होने वाली शांति वार्ता को हरी झंडी दे दी है। हालांकि अभी तक दोनों देशों के बीच दूसरे दौर की वार्ता की तारीख और स्थान को अंतिम रूप नहीं दिया जा सका है। ट्रंप प्रशासन पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि वह बिना किसी पूर्व शर्त के सीधी बातचीत के लिए तैयार है।
ट्रंप का बड़ा दावा, नई डील JCPOA से कहीं बेहतर होगी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर एक पोस्ट में लिखा कि ईरान के साथ जो नया समझौता किया जा रहा है वह संयुक्त व्यापक कार्य योजना (जेसीपीओए) से कहीं अधिक बेहतर और व्यापक होगा। जेसीपीओए को आमतौर पर ईरान परमाणु समझौते के नाम से जाना जाता है। ट्रंप ने कहा कि यह डील क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित करेगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह पुराने समझौते की तुलना में अमेरिकी हितों की अधिक मजबूती से रक्षा करेगी।
ईरानी संसद अध्यक्ष का कड़ा रुख, धमकी और बातचीत एक साथ नहीं
दूसरी ओर ईरान की ओर से संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकर कालिबाफ ने अमेरिकी रुख पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। कालिबाफ ने तेहरान में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि धमकी और कूटनीतिक वार्ता एक साथ नहीं चल सकती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि अमेरिका वास्तव में शांति चाहता है तो उसे सम्मानजनक भाषा अपनानी होगी। ईरानी नेतृत्व लगातार यह संदेश दे रहा है कि वह दबाव की राजनीति के आगे झुकने वाला नहीं है।
उच्च स्तरीय अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान रवाना
राष्ट्रपति ट्रंप ने स्वयं इस बात की पुष्टि की है कि अमेरिका का एक उच्च स्तरीय वार्ता दल पाकिस्तान पहुंच रहा है। इस प्रतिनिधिमंडल में उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के अलावा राष्ट्रपति के वरिष्ठ सलाहकार जेरेड कुश्नर और विशेष दूत स्टीव विटकॉफ जैसे प्रभावशाली नेता शामिल हैं। यह टीम ईरानी नेतृत्व के साथ सीधे संपर्क स्थापित करेगी। माना जा रहा है कि इस बैठक में युद्धविराम की अवधि बढ़ाने और स्थायी शांति की रूपरेखा तैयार करने पर विस्तृत चर्चा की जाएगी।
सीजफायर की समय सीमा समाप्त होने पर क्या होगा?
यदि अगले चौबीस घंटों में कोई ठोस समझौता नहीं हो पाता है तो क्षेत्र में फिर से सैन्य तनाव बढ़ने की आशंका है। अमेरिकी नौसेना ने पहले ही अरब सागर में अपनी स्थिति मजबूत कर ली है। विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन अंतिम समय तक कूटनीतिक दरवाजे खुले रखना चाहता है। इस्लामाबाद में प्रस्तावित वार्ता को इस संकट के समाधान की अंतिम उम्मीद के रूप में देखा जा रहा है। दोनों देशों के बीच पिछले कुछ सप्ताह से जारी गतिरोध ने वैश्विक तेल बाजारों को भी अस्थिर कर रखा है।
JCPOA का संक्षिप्त इतिहास और वर्तमान विवाद
संयुक्त व्यापक कार्य योजना (JCPOA) पर वर्ष 2015 में ईरान और छह विश्व शक्तियों के बीच हस्ताक्षर हुए थे। इसके तहत ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने पर सहमति जताई थी। बदले में पश्चिमी देशों ने ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंध हटाने का वादा किया था। लेकिन वर्ष 2018 में तत्कालीन राष्ट्रपति ट्रंप ने अमेरिका को इस समझौते से अलग कर लिया था। तब से दोनों देशों के संबंधों में लगातार कड़वाहट घुलती गई। अब ट्रंप एक नई और अधिक सख्त डील पर जोर दे रहे हैं।
