पहलगाम हमले के बाद बैसरन घाटी अब भी बंद, दिल्ली से जाने का क्या है पूरा रास्ता और खर्च?

Jammu Kashmir News: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकी हमले के बाद पर्यटकों की आवाजाही पर गहरा असर पड़ा था। हमले के तुरंत बाद घाटी में सैलानियों की संख्या में तेज गिरावट दर्ज की गई। हालांकि अब धीरे-धीरे हालात सामान्य हो रहे हैं और पर्यटकों का आगमन बढ़ने लगा है। बावजूद इसके, सुरक्षा एजेंसियों ने मिनी स्विट्जरलैंड कही जाने वाली बैसरन घाटी को अभी भी आम लोगों के लिए बंद रखा है। अगर आप दिल्ली से इस खूबसूरत जगह का रुख करने की योजना बना रहे हैं तो यात्रा का सही तरीका और मौजूदा खर्च जानना बेहद जरूरी है।

बैसरन घाटी तक क्यों नहीं जाती सीधी गाड़ी?

यह समझना आवश्यक है कि बैसरन घाटी कोई ऐसा स्थान नहीं है जहां आप सीधे कार या बस से उतर सकें। यह पहलगाम के समीप एक सुनियोजित ट्रैकिंग मार्ग के अंत में बसा हुआ है। देवदार के घने जंगलों और हरे-भरे मैदानों के बीच स्थित यह घाटी अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए विश्व प्रसिद्ध है। यहां तक पहुंचने के लिए आपको पहले पहलगाम पहुंचना होगा। उसके बाद वहां से करीब 4 से 5 किलोमीटर की दूरी या तो पैदल चलकर तय करनी होती है या फिर स्थानीय टट्टुओं की सवारी का सहारा लेना पड़ता है। यही कारण है कि यह स्थान अपेक्षाकृत कम भीड़भाड़ वाला और अत्यधिक शांत बना रहता है।

दिल्ली से श्रीनगर और फिर पहलगाम तक का सफर

दिल्ली से बैसरन घाटी तक पहुंचने का सबसे तीव्र और सुविधाजनक माध्यम हवाई यात्रा है। राष्ट्रीय राजधानी से श्रीनगर के लिए नियमित उड़ानें उपलब्ध हैं। हवाई यात्रा में लगभग 45 से 50 मिनट का समय लगता है। एयरलाइन और बुकिंग की अवधि के आधार पर एक तरफ का किराया 3,000 से 5,000 रुपये के बीच हो सकता है। श्रीनगर के शेख-उल-आलम अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरने के बाद आपको सड़क मार्ग से पहलगाम की ओर बढ़ना होता है। यह दूरी लगभग 90 किलोमीटर है और इसे तय करने में ढाई से साढ़े तीन घंटे लग जाते हैं।

श्रीनगर एयरपोर्ट से पहलगाम टैक्सी किराया

श्रीनगर हवाई अड्डे से पहलगाम के लिए प्रीपेड या निजी टैक्सी सबसे आरामदायक विकल्प है। एक निजी कैब का किराया आमतौर पर 3,000 से 4,000 रुपये तक होता है। यदि आप कम खर्च में यात्रा करना चाहते हैं तो एयरपोर्ट से बाहर निकलकर शेयरिंग टैक्सी या सूमो का विकल्प चुन सकते हैं। शेयरिंग गाड़ी में प्रति व्यक्ति किराया काफी कम हो जाता है। हालांकि इसमें गाड़ी के भरने का इंतजार करना पड़ सकता है। सड़क मार्ग से जाते समय अनंतनाग और पहलगाम के बीच का नजारा बेहद मनोरम है।

बजट यात्रियों के लिए ट्रेन और बस का विकल्प

यदि आप किफायती यात्रा की तलाश में हैं तो रेल और सड़क का संयुक्त मार्ग अपना सकते हैं। इसके लिए आपको पहले दिल्ली से जम्मू तवी तक ट्रेन पकड़नी होगी। जम्मू पहुंचने के बाद वहां से श्रीनगर या अनंतनाग के लिए सरकारी या निजी बसें आसानी से मिल जाती हैं। जम्मू से श्रीनगर का बस सफर लगभग 8 से 10 घंटे का होता है। अनंतनाग या श्रीनगर से पहलगाम के लिए फिर स्थानीय साझा टैक्सी या बस पकड़नी पड़ती है। यह विकल्प हवाई यात्रा की तुलना में काफी सस्ता है लेकिन इसमें आपको एक पूरा अतिरिक्त दिन लग सकता है।

पहलगाम से बैसरन घाटी तक का अंतिम पड़ाव

पहलगाम के मुख्य बाजार से बैसरन घाटी की ओर जाने वाला रास्ता बेहद रोमांचक और सुरम्य है। इस मार्ग पर कोई भी चौपहिया वाहन नहीं जा सकता। यात्रियों के पास केवल दो विकल्प होते हैं। पहला, घने जंगलों के बीच से बने पगडंडी मार्ग पर पैदल चढ़ाई करना। दूसरा, स्थानीय पोनीवालों से टट्टू किराए पर लेना। सुरक्षा कारणों से अभी यह क्षेत्र बंद है लेकिन जब यह खुलेगा तो वर्ष 2026 तक के लिए टट्टू किराया 1,320 रुपये प्रति व्यक्ति निर्धारित किया गया है। यह कीमत मौसम और पर्यटकों की संख्या के अनुसार थोड़ी बदल सकती है।

बैसरन घाटी की खासियत और घूमने का सही समय

बैसरन घाटी को अक्सर कश्मीर का मिनी स्विट्जरलैंड कहा जाता है। यह उपाधि इसकी मखमली हरी घास और चारों ओर फैले ऊंचे देवदार के वृक्षों के कारण दी गई है। यहां से दूर तक फैली बर्फीली चोटियों का नजारा मन मोह लेता है। यह स्थान विशेष रूप से प्रकृति प्रेमियों और फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए स्वर्ग के समान है। घाटी घूमने का सर्वोत्तम समय अप्रैल से जून के बीच का है। इस दौरान मौसम सुहावना रहता है और चारों ओर हरियाली अपने चरम पर होती है। जुलाई से सितंबर के बीच भी यहां आया जा सकता है लेकिन इस मौसम में बारिश की संभावना अधिक होती है।

गाइड और सुरक्षा नियमों का रखें ध्यान

बैसरन घाटी की यात्रा के दौरान स्थानीय प्रशासन और पर्यटन विभाग के निर्देशों का पालन करना अनिवार्य है। चूंकि यह क्षेत्र संवेदनशील श्रेणी में आता है इसलिए यहां जाने से पहले स्थानीय पुलिस या पर्यटन कार्यालय से अनुमति लेना और घाटी के खुलने की पुष्टि कर लेना जरूरी है। पैदल यात्रा करते समय या टट्टू पर बैठते समय एक अनुभवी स्थानीय गाइड साथ रखना बेहतर होता है। गाइड का खर्च टट्टू किराए से अलग होता है और यह आपकी सुरक्षा और सुविधा के लिए लाभदायक साबित होता है। कश्मीर की यह अनमोल विरासत अभी फिलहाल बंद है लेकिन जैसे ही प्रशासन हरी झंडी देगा, यह सैलानियों के लिए फिर से खुल जाएगी।

SOURCE: न्यूज एजेंसी
/ month
placeholder text

Hot this week

Topics

Related Articles

Popular Categories