Uttar Pradesh News: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महिला आरक्षण विधेयक के लोकसभा में पारित न होने के मुद्दे पर विपक्ष के खिलाफ बड़ा राजनीतिक मोर्चा खोल दिया है। लखनऊ में सोमवार को ‘जन आक्रोश महिला पदयात्रा’ का आयोजन कर उन्होंने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी सहित कई दलों पर जमकर हमला बोला। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पदयात्रा देश की आधी आबादी के आक्रोश का जीवंत प्रतीक बनेगी और विपक्षी दलों की महिला विरोधी मानसिकता को उजागर करेगी।
राजधानी लखनऊ की सड़कों पर निकली इस विशाल पदयात्रा में हजारों की संख्या में महिलाएं शामिल हुईं। योगी आदित्यनाथ ने इस मौके पर कहा कि बहनों के नेतृत्व में निकला यह जन सैलाब देश की राजनीति में एक नया अध्याय लिखेगा। उन्होंने स्पष्ट रूप से आरोप लगाया कि कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम जैसे दलों ने हमेशा महिला सशक्तिकरण की राह में रोड़े अटकाए हैं। सीएम ने कहा कि यह मार्च विपक्ष को आईना दिखाने का काम करेगा।
उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने सपा को दी चेतावनी
इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने भी बेहद आक्रामक तेवर दिखाए। उन्होंने सीधे तौर पर समाजवादी पार्टी को चेतावनी देते हुए कहा कि जिस तरह का विरोध इस विधेयक का किया गया है, उसका परिणाम पार्टी को भुगतना ही पड़ेगा। ब्रजेश पाठक ने कहा कि आने वाले समय में जनता इसका जवाब चुनावों के माध्यम से अवश्य देगी। उन्होंने कहा कि महिलाओं के अधिकारों के साथ खिलवाड़ करने वालों को क्षमा नहीं किया जाएगा।
पदयात्रा में शामिल महिलाओं ने हाथों में तख्तियां और नारे लगाते हुए अपना विरोध दर्ज कराया। पूरा माहौल महिला सशक्तिकरण के पक्ष में था और विपक्षी दलों के खिलाफ गहरी नाराजगी देखी गई। उपमुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि जब तक महिलाओं को उनका संवैधानिक अधिकार नहीं मिल जाता, यह संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए कहा कि पार्टी हर हाल में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण दिलाकर रहेगी।
पंकज चौधरी बोले- विपक्ष ने महिला आरक्षण की हत्या कर दी
केंद्रीय मंत्री और उत्तर प्रदेश भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष पंकज चौधरी ने भी इस अवसर पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि पूरे देश की महिलाओं में भारी आक्रोश है क्योंकि उनके उत्थान और सम्मान की राह में बाधा डाली गई है। पंकज चौधरी ने जोर देकर कहा कि महिलाओं का सम्मान और उत्थान ही भारतीय जनता पार्टी की वास्तविक पहचान है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार लगातार इस दिशा में कार्य कर रही है।
उन्होंने नारी शक्ति वंदन अधिनियम के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इसका लक्ष्य देश की माताओं और बहनों को नेतृत्व का अवसर प्रदान करना था। इस कानून के तहत महिलाओं को संसद और राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत सीटों पर चुनाव लड़ने का अधिकार मिलना था। पंकज चौधरी ने गृह मंत्री अमित शाह के भाषण का हवाला देते हुए कहा कि इस आरक्षण से किसी भी वर्ग का कोई नुकसान नहीं होने वाला था बल्कि इससे देश को विकास की राह पर ले जाने में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित होती।
परिवारवादी पार्टियों पर साधा निशाना
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने आगे कहा कि इस स्पष्ट लक्ष्य के बावजूद विपक्ष ने जानबूझकर संसद में इस विधेयक को पारित नहीं होने दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस जैसे दल हमेशा से महिला आरक्षण का विरोध करते रहे हैं। इन दलों को यह भली-भांति ज्ञात है कि यदि महिलाएं राजनीतिक रूप से आगे बढ़ीं तो इनके वंशवाद और परिवारवाद की जड़ें पूरी तरह से हिल जाएंगी। उन्होंने कहा कि यही डर उन्हें महिलाओं के अधिकारों को कुचलने पर मजबूर करता है।
पंकज चौधरी ने विपक्ष पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि उन्होंने संसद के भीतर महिला आरक्षण विधेयक की राजनीतिक हत्या कर दी है। उन्होंने दावा किया कि अब इसका जवाब देश की जनता देगी और आने वाले चुनावों में महिला मतदाता उन दलों को सबक सिखाएंगी। इस पदयात्रा के माध्यम से भारतीय जनता पार्टी ने यह स्पष्ट संदेश देने का प्रयास किया कि वह आगामी चुनावों में महिला आरक्षण को एक बड़ा चुनावी मुद्दा बनाने की तैयारी कर रही है।
महिला सशक्तिकरण को नई दिशा देने का दावा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में इस पदयात्रा को केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम न बताकर इसे एक सामाजिक क्रांति की शुरुआत करार दिया। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन महिला सशक्तिकरण के मुद्दे को एक नई धार देने का काम करेगा। सीएम ने विश्वास जताया कि यह जन जागरण अभियान देश के कोने-कोने तक पहुंचेगा और हर महिला अपने हक के लिए आवाज उठाने को प्रेरित होगी। उन्होंने कहा कि महिलाओं के बिना देश के विकास की कल्पना अधूरी है।
पदयात्रा में शामिल महिलाओं ने भी अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। कई महिलाओं ने कहा कि उन्हें विश्वास ही नहीं हो रहा था कि इक्कीसवीं सदी में भी उनके राजनीतिक अधिकारों को इस तरह कुचला जा सकता है। उन्होंने कहा कि यदि यह विधेयक पारित हो जाता तो देश की राजनीति की दिशा ही बदल जाती। भाजपा नेताओं ने इस अवसर पर यह भी आश्वासन दिया कि पार्टी इस मुद्दे को लेकर संसद के अंदर और सड़क पर लगातार संघर्ष करती रहेगी। यह पूरा घटनाक्रम आगामी लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा द्वारा विपक्ष को घेरने की एक बड़ी रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
