Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनावों को लेकर राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। वन क्षेत्रों में रहने वाले हजारों परिवारों को बड़ी राहत मिली है। पंचायती राज विभाग ने वन भूमि पर कब्जे के नियमों में अहम बदलाव किया है। जिन परिवारों के वन अधिकार दावे अभी तक लंबित हैं, उन्हें चुनाव लड़ने के अयोग्य नहीं ठहराया जाएगा। सरकार का यह निर्णय अनुसूचित जनजाति और पारंपरिक वन निवासियों के लिए बड़ी जीत माना जा रहा है।
पंचायती राज विभाग ने सभी उपायुक्तों को जारी किए निर्देश
पंचायती राज विभाग ने सोमवार को एक आधिकारिक पत्र जारी किया है। विभाग ने राज्य के सभी उपायुक्तों को नए नियमों का पालन करने का निर्देश दिया है। विधि विभाग की कानूनी राय के बाद यह कदम उठाया गया है। हिमाचल प्रदेश पंचायती राज अधिनियम के तहत अब लंबित दावों वाले आवेदकों को अयोग्य नहीं माना जा सकता। यह छूट केवल उन लोगों को मिलेगी जिन्होंने अपने दावों के निपटारे के लिए पहले ही आवेदन कर दिया है।
नामांकन के समय उम्मीदवारों को दिखाने होंगे ये जरूरी दस्तावेज
चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों को नामांकन के दौरान जरूरी दस्तावेज जमा करने होंगे। विभाग ने सहायक रिटर्निंग अधिकारियों को इस प्रक्रिया की जांच करने के सख्त निर्देश दिए हैं। प्रत्याशियों को वन अधिकार दावा फार्म की प्रति दिखानी होगी। इसके साथ ही वन अधिकार समिति द्वारा जारी रसीद और स्वीकृति पत्र भी जमा करना होगा। इन दस्तावेजों से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि उम्मीदवार ने वास्तव में अपना वैध दावा दाखिल किया था। चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रहेगी।
लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लेने का मिलेगा समान अवसर
विभाग ने यह स्पष्टीकरण दो अगस्त दो हजार इक्कीस को जारी पूर्व निर्देशों के आधार पर दिया है। इस फैसले से वन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को चुनाव प्रक्रिया में भाग लेने का अवसर मिलेगा। इससे उनके अधिकारों की रक्षा भी सुनिश्चित हो सकेगी। सभी जिला पंचायत अधिकारियों और खंड विकास अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के आदेश दे दिए गए हैं। यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों के विकास और चुनावों में हर वर्ग की भागीदारी बढ़ाने में मददगार साबित होगी।
