Himachal Pradesh News: स्कूल शिक्षा बोर्ड ने राज्य की शिक्षा प्रणाली में ऐतिहासिक कदम उठाया है। शिक्षा नीति 2020 के तहत स्कूलों में पढ़ाई का तरीका बदल रहा है। अब बच्चों की काबिलियत केवल किताबी अंकों से नहीं मापी जाएगी। इसके बजाय छात्रों के कौशल और मानसिक विकास को परखा जाएगा। इसके लिए होलिस्टिक प्रोग्रेस कार्ड प्रणाली शुरू की गई है। सोमवार से शिमला और कांगड़ा जिलों में इसका पायलट प्रोजेक्ट शुरू हो गया है।
नौवीं से बारहवीं कक्षा के छात्रों के लिए डिजिटल प्रगति पत्रक
स्कूल शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. राजेश शर्मा ने नई व्यवस्था की जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि यह प्रगति पत्रक संस्था ‘परख’ और एनसीईआरटी के सहयोग से बना है। इसे नौवीं से बारहवीं कक्षा के छात्रों के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया है। यह नया कार्ड पूरी तरह से डिजिटल रूप में काम करेगा। डिजिटल होने से बच्चों का डेटा सुरक्षित रखना बहुत आसान हो जाएगा। इससे राज्य की शिक्षा प्रणाली में ज्यादा पारदर्शिता और जवाबदेही आएगी।
शिमला और कांगड़ा के 10 स्कूलों में पायलट प्रोजेक्ट शुरू
शिक्षा बोर्ड ने पहले चरण के लिए रणनीतिक रूप से दो जिलों का चुनाव किया है। शिमला और कांगड़ा के दस स्कूलों में यह पायलट प्रोजेक्ट लागू किया गया है। इनमें सरकारी और निजी दोनों तरह के स्कूल मुख्य रूप से शामिल किए गए हैं। बोर्ड ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियों के आधार पर अपना फीडबैक लेगा। यह महत्वपूर्ण फीडबैक भविष्य की सरकारी योजनाओं के लिए बहुत अधिक लाभदायक साबित होगा।
होलिस्टिक प्रोग्रेस कार्ड से बदल जाएगी शिक्षा प्रणाली की तस्वीर
पुरानी रिपोर्ट कार्ड प्रणाली में केवल अलग-अलग विषयों के अंक लिखे जाते थे। लेकिन नया होलिस्टिक प्रोग्रेस कार्ड विद्यार्थियों के संपूर्ण व्यक्तित्व का सच्चा दर्पण बनेगा। इसमें बच्चों के व्यवहार और उनकी रचनात्मकता को भी पूरी अहमियत दी जाएगी। बोर्ड का मुख्य उद्देश्य राज्य की शिक्षा प्रणाली को आधुनिक और प्रभावी बनाना है। इस पायलट प्रोजेक्ट के सफल होने के बाद इसे पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा। चरणबद्ध तरीके से सभी स्कूलों को इससे जोड़ा जाएगा।
