Reddit पर भारतीय कर्मचारी का ‘सपनों की नौकरी’ वाला पोस्ट वायरल, बोला- ‘दोपहर 2 बजे ऑफिस आता हूं, 5 बजे निकल जाता हूं’, लोग बोले- काश!

Career News: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म रेडिट पर इन दिनों एक भारतीय सॉफ्टवेयर कर्मचारी का पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है। इस पोस्ट ने नौकरीपेशा लोगों को अपनी किस्मत पर रश्क करने को मजबूर कर दिया है। यूजर ने यूरोप स्थित एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में अपने कार्य अनुभव को साझा किया है। उसने ऑफिस के लचीले समय और कम दबाव वाले कार्य संस्कृति की जमकर तारीफ की है। पोस्ट पढ़ने के बाद हर कोई यही कह रहा है कि काश ऐसी नौकरी सबको मिले।

रेडिट पर ‘डेवलपर्सइंडिया’ नामक समुदाय में यूजर ने अपनी आपबीती बताई। उसने लिखा कि वह एक यूरोपीय बहुराष्ट्रीय कंपनी में कार्यरत है और वहां का जीवन बहुत शानदार है। सबसे दिलचस्प बात ऑफिस टाइमिंग को लेकर कही गई है। कागजों पर भले ही समय सुबह ग्यारह से रात आठ बजे तक दर्ज हो लेकिन वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग है। यूजर ने बताया कि वह और उसके कई सहकर्मी दोपहर दो बजे ऑफिस पहुंचते हैं और शाम पांच बजे घर लौट जाते हैं।

काम का दबाव नहीं, सीखने पर रहता है फोकस

कर्मचारी ने अपनी पोस्ट में बताया कि कंपनी में काम के दबाव की कोई अनावश्यक भावना नहीं है। कार्य को छोटे-छोटे स्प्रिंट और सीमित कार्यों के आधार पर विभाजित किया जाता है। इस व्यवस्था के कारण कार्यभार कभी भी अधिक नहीं लगता है और काम को तय समय सीमा के भीतर आराम से पूरा किया जा सकता है। उसने यह भी बताया कि काम जल्दी खत्म होने के बाद उसे नई कुशलताएं सीखने का भरपूर अवसर मिलता है।

वह फिलहाल एक नई ग्रीनफील्ड परियोजना पर काम कर रहा है। इस परियोजना के तहत उसे कोड को बेहतर ढंग से समझने और विभिन्न तकनीकी पहलुओं पर काम करने का मौका मिल रहा है। यूजर का मानना है कि यह माहौल उसके व्यावसायिक विकास के लिए बेहद अनुकूल है। काम खत्म होने के बाद वह बिना किसी मानसिक थकान के अपना निजी समय व्यतीत कर पाता है।

हाइब्रिड मॉडल और वर्क फ्रॉम होम की सुविधा

यूजर ने कंपनी की हाइब्रिड कार्य संस्कृति के बारे में भी जानकारी साझा की। उसने बताया कि कंपनी में हाइब्रिड मॉडल लागू है जिसके तहत सप्ताह में दो या तीन दिन ही कार्यालय आने की बाध्यता है। शेष कार्यदिवसों में कर्मचारी घर से काम करने की सुविधा का लाभ उठा सकते हैं। यह व्यवस्था कर्मचारियों को यात्रा के झंझट से बचाती है और उनकी उत्पादकता को भी बढ़ाती है।

हालांकि, उसने यह भी स्वीकार किया कि कई कर्मचारी इस नियम का बहुत सख्ती से पालन नहीं करते हैं। फिर भी कंपनी की ओर से इस पर कोई विशेष आपत्ति नहीं जताई जाती है। प्रबंधन का मानना है कि जब तक परियोजना का कार्य प्रभावित नहीं हो रहा है तब तक समय की पाबंदी को लेकर लचीला रवैया अपनाया जा सकता है। यह भरोसा कर्मचारियों के मनोबल को काफी ऊंचा बनाए रखता है।

सोशल मीडिया पर लोगों की मिलीजुली प्रतिक्रिया

इस पोस्ट पर रेडिट यूजर्स ने जमकर अपनी प्रतिक्रियाएं दीं। कई लोगों ने कहा कि ऐसा कार्य वातावरण मिलना वास्तव में सौभाग्य की बात है। एक यूजर ने लिखा कि यूरोप की कंपनियां आम तौर पर कार्य और जीवन के बीच संतुलन को अधिक प्राथमिकता देती हैं। वहां के लोग अधिक आरामदायक और उत्पादक जीवन जी पाते हैं। कई भारतीय पेशेवरों ने अपनी नौकरियों से तुलना करते हुए इस कल्चर की सराहना की।

वहीं कुछ अनुभवी यूजर्स ने इस संबंध में एक सतर्क करने वाली टिप्पणी भी की। उनका कहना था कि ऐसा सुनहरा माहौल हमेशा स्थायी नहीं रहता है। कई बार यह शांति तब तक ही सीमित रहती है जब तक परियोजना पर ज्यादा दबाव नहीं आता या कंपनी का प्रबंधन नहीं बदलता। उनका मानना है कि नई प्रबंधन टीम के आने के बाद नियम और कार्यशैली में अचानक बदलाव देखने को मिल सकता है। फिर भी फिलहाल यह पोस्ट उन लाखों भारतीय कर्मचारियों के लिए एक सपना बनी हुई है जो तनावपूर्ण कार्य संस्कृति से जूझ रहे हैं।

SOURCE: न्यूज एजेंसी
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