America News: अमेरिका की राजनीति में इस वक्त हड़कंप मचा हुआ है। ट्रंप प्रशासन की श्रम मंत्री लोरी चावेज-डेरेमर ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन पर सरकारी धन के दुरुपयोग और गंभीर कदाचार के आरोप लगे हैं। आरोपों के मुताबिक जब देश संकट और शटडाउन से जूझ रहा था, तब मंत्री महोदया सरकारी खर्च पर ‘पूल पार्टी’ का आनंद ले रही थीं। हाल के दिनों में यह तीसरा मौका है जब ट्रंप कैबिनेट के किसी सदस्य को बाहर जाना पड़ा है।
नैतिकता के आधार पर छोड़ना पड़ा पद
न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार 58 वर्षीय लोरी चावेज-डेरेमर के खिलाफ आंतरिक जांच शुरू हो गई थी। इस जांच के दबाव में उन्होंने नैतिकता का हवाला देते हुए पद छोड़ने की घोषणा की है। डेरेमर के साथ उनके विभाग के चार अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भी इस्तीफा दिया है। इन सभी पर सरकारी पैसों से निजी जश्न मनाने का आरोप है। व्हाइट हाउस ने हालांकि इसे निजी क्षेत्र में जाने का फैसला बताया है।
शराब, चिल्लाहट और पद का दुरुपयोग
डेरेमर के खिलाफ शिकायतों का अंबार लगा हुआ था। जांच में सामने आया है कि वह अपने मातहत कर्मचारियों पर अक्सर चीखती-चिल्लाती थीं। उन पर ड्यूटी के दौरान शराब का सेवन करने के भी गंभीर आरोप लगे हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने कानून ताक पर रखकर अपने करीबी अफसरों को सरकारी खजाने से विदेश दौरों पर भेजा। सुरक्षा गार्डों को लेकर भी उनके खिलाफ कई शिकायतें दर्ज कराई गई थीं।
संकट के समय ‘पूल पार्टी’ बनी गले की फांस
अक्टूबर 2025 में जब अमेरिका में शटडाउन की घोषणा हुई थी, तब डेरेमर सुर्खियों में आईं। उस संवेदनशील समय में वह काम पर ध्यान देने के बजाय दोस्तों के साथ पार्टी कर रही थीं। स्थानीय मीडिया में इस खबर के आने के बाद भारी हंगामा मच गया था। शुरुआती जांच में पाया गया कि वह सरकारी समय में क्लबों में शराब पीने जाती थीं। जांच रिपोर्ट सीनेट को भेजने के बाद उनका जाना तय हो गया था।
ट्रंप कैबिनेट को लगा बड़ा झटका
58 साल की लोरी चावेज को ट्रंप ने अपनी दूसरी पारी में बड़ी जिम्मेदारी दी थी। उन्हें श्रम मंत्री बनाकर कैबिनेट में शामिल किया गया था। व्हाइट हाउस के प्रवक्ता स्टीवन चेउंग ने उनके कार्यकाल की तारीफ जरूर की है। उन्होंने कहा कि डेरेमर ने श्रम क्षेत्र के लिए उल्लेखनीय कार्य किए हैं। हालांकि, भ्रष्टाचार और अनैतिकता के इन खुलासों ने प्रशासन की छवि पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ट्रंप कैबिनेट के लिए यह एक बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।
