डोनाल्ड ट्रंप का पाकिस्तान दौरा: 20 साल का ‘सूखा’ खत्म करने की तैयारी या महज एक चुनावी दांव?

World News: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान दौरे को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने संकेत दिया कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा गतिरोध किसी समझौते पर समाप्त होता है, तो वह इस्लामाबाद जा सकते हैं। ट्रंप के अनुसार, दोनों देशों के बीच पिछले छह सप्ताह से जारी तनाव अब खत्म होने के करीब है। उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान की जनता उन्हें पसंद करती है और वह वहां जाने के इच्छुक हैं।

दो दशक से किसी अमेरिकी राष्ट्रपति ने नहीं रखा कदम

पिछले 20 वर्षों का इतिहास देखें तो किसी भी अमेरिकी राष्ट्रपति ने पाकिस्तान का आधिकारिक दौरा नहीं किया है। इसे कूटनीतिक हलकों में पाकिस्तान के लिए एक बड़े झटके के रूप में देखा जाता है। आखिरी बार साल 2006 में जॉर्ज डब्ल्यू बुश पाकिस्तान गए थे। यह दौरा भारत के साथ ऐतिहासिक सिविल न्यूक्लियर डील की सफलता के ठीक बाद हुआ था। तब बुश भारत के सफल दौरे के बाद केवल 24 घंटों के लिए इस्लामाबाद रुके थे।

सैन्य शासन और अमेरिकी राष्ट्रपतियों का अजीब संयोग

पाकिस्तान के इतिहास में एक दिलचस्प पैटर्न देखने को मिलता है। जब भी कोई अमेरिकी राष्ट्रपति वहां गया, उस समय वहां अक्सर सैन्य शासन लागू था। 1959 में जब ड्वाइट आइजनहावर पहले अमेरिकी राष्ट्रपति के रूप में वहां पहुंचे, तब जनरल अयूब खान सत्ता में थे। इसी तरह, रिचर्ड निक्सन और बिल क्लिंटन के दौरों के समय भी सत्ता की बागडोर सेना या उसके समर्थित नेताओं के हाथ में थी।

ओबामा और बाइडेन ने बनाई पाकिस्तान से दूरी

जॉर्ज बुश के बाद बराक ओबामा, डोनाल्ड ट्रंप (पहले कार्यकाल) और जो बाइडेन ने पाकिस्तान जाने की जरूरत महसूस नहीं की। ओबामा ने अपने कार्यकाल के दौरान दो बार भारत का दौरा किया, लेकिन सरहद पार नहीं गए। 2015 के उनके भारत दौरे के बाद अमेरिकी मीडिया ने टिप्पणी की थी कि पाकिस्तान के लोग अपनी विजिटर्स बुक खाली देखते रह गए। व्हाइट हाउस ने बाद में संबंधों की जटिलता को इसके पीछे की मुख्य वजह बताया था।

आंकड़ों में पाकिस्तान की कूटनीतिक विफलता

आजादी के बाद से अब तक केवल पांच अमेरिकी राष्ट्रपतियों ने पाकिस्तान की धरती पर कदम रखा है। इसके विपरीत, पाकिस्तान के राष्ट्राध्यक्षों और नेताओं ने 42 बार अमेरिका की यात्रा की है। यह अंतर दर्शाता है कि अमेरिका की प्राथमिकता सूची में पाकिस्तान का स्थान नीचे खिसका है। औसतन हर 14 साल में एक बार कोई अमेरिकी राष्ट्रपति वहां जाता है, जबकि भारत के साथ अमेरिका के संबंध अब कहीं अधिक प्रगाढ़ और रणनीतिक हो चुके हैं।

SOURCE: न्यूज एजेंसी
/ month
placeholder text

Hot this week

Topics

Related Articles

Popular Categories