Parliament News: संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े तीन विधेयकों पर आज वोटिंग होगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सभी दलों से सर्वसम्मति की अपील करते हुए कहा कि विरोध करने वालों को लंबे समय तक कीमत चुकानी पड़ेगी। विपक्ष ने परिसीमन पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस ने बिल वापस लेने की मांग की है।
तीन ऐतिहासिक विधेयक पेश, देर रात तक चली बहस
सरकार ने गुरुवार को लोकसभा में ‘संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026’, ‘परिसीमन विधेयक 2026’ और ‘संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक 2026’ पेश किए। इन पर देर रात एक बजकर 20 मिनट तक चर्चा हुई। शुक्रवार सुबह चर्चा फिर से शुरू होगी, जिसके बाद वोटिंग कराई जाएगी। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि सरकार महिला आरक्षण के नाम पर परिसीमन कर अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत कर रही है और ओबीसी की हिस्सेदारी घटा रही है।
विपक्ष ने उठाए सवाल, कांग्रेस ने बिल वापस लेने की मांग की
विपक्ष के नेताओं ने विधेयकों के समय पर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने सरकार से बिल वापस लेने और सभी पार्टियों की बैठक बुलाकर आम सहमति बनाने की बात कही। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण को परिसीमन से मुक्त करके मौजूदा 543 सीटों के आधार पर 2029 से ही लागू किया जा सकता है। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि सरकार इसके जरिए अन्य पिछड़े वर्गों से उनकी हिस्सेदारी छीनने की तैयारी में है।
PM मोदी का बयान- राजनीति के तराजू से न तौलें, श्रेय देने को तैयार
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सभी दलों से विधेयक को सर्वसम्मति से पारित करने की अपील की। उन्होंने कहा कि जो भी इसका विरोध करेगा, उसे लंबे समय तक कीमत चुकानी पड़ेगी। पीएम मोदी ने कहा कि इस विषय को राजनीति के तराजू से नहीं तौलना चाहिए और वह इसका श्रेय विपक्षी दलों को देने को भी तैयार हैं। उन्होंने परिसीमन से जुड़ी चिंताओं को खारिज करते हुए कहा कि सीटों के अनुपात में कोई बदलाव नहीं होगा और वृद्धि भी उसी अनुपात में होगी।
2023 का महिला आरक्षण अधिनियम 16 अप्रैल से लागू
केंद्रीय विधि मंत्रालय ने गुरुवार को अधिसूचना जारी कर बताया कि संविधान (106वां संशोधन) अधिनियम, 2023 (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) 16 अप्रैल, 2026 से प्रभावी हो गया है। यह कानून लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने का प्रावधान करता है। हालांकि, इसे लागू करने के लिए परिसीमन प्रक्रिया पूरी होना जरूरी है। सरकार इसे 2029 के चुनावों से लागू करना चाहती है, जिसके लिए ये तीनों विधेयक लाए गए हैं। आज की वोटिंग के बाद साफ हो जाएगा कि यह ऐतिहासिक कानून कब तक जमीन पर उतरेगा।
