Madhya Pradesh News: मध्य प्रदेश के दतिया जिले से एक हैरान कर देने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। दतिया के बेरछा गांव में चल रही भागवत कथा के दौरान व्यास गद्दी पर बैठे संत सीताराम बाबा ने सेवड़ा से बीजेपी विधायक प्रदीप अग्रवाल के साथ उग्र व्यवहार किया। बाबा ने विधायक को न केवल डांटा, बल्कि उन्हें मुक्के मारे, धक्का दिया और उनकी पहनाई हुई माला उन्हीं के चेहरे पर दे मारी। इस पूरी घटना के दौरान विधायक शांत रहे और हाथ जोड़कर बाबा के सामने घुटनों के बल बैठे रहे।
कौन हैं उग्र शैली वाले सीताराम बाबा?
सीताराम बाबा मध्य प्रदेश के भिंड जिले के निसरोल मंदिर के महंत और एक बेहद प्रतिष्ठित संत हैं। वे रसनौल के प्रसिद्ध संत ‘मस्तराम बाबा’ के शिष्य हैं और उन्हीं की आध्यात्मिक परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। बाबा के अनुयायियों में न केवल आम लोग, बल्कि मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बड़े राजनेता और उद्योगपति भी शामिल हैं। वे अपनी स्पष्टवादिता और सादगी के लिए जाने जाते हैं। भक्त उन्हें दिखावे से दूर रहने वाला एक सरल व्यक्तित्व मानते हैं।
भक्तों के लिए ‘प्रसाद’ है बाबा की नाराजगी
सीताराम बाबा अपनी विशिष्ट और अक्सर उग्र शैली के कारण हमेशा चर्चा का केंद्र बने रहते हैं। उनके बारे में प्रसिद्ध है कि वे कभी-कभी तैश में आकर भक्तों को धक्का दे देते हैं या माला फेंककर मारते हैं। बाबा के समर्थक इस व्यवहार को अपमान नहीं, बल्कि एक ‘विशेष आशीर्वाद’ के रूप में देखते हैं। अनुयायियों का तर्क है कि बाबा केवल उन्हीं पर अपना हक जताते हैं जिन्हें वे अपना मानते हैं। उनके गुरु भी इसी मस्त स्वभाव के लिए जाने जाते थे।
वायरल वीडियो में क्या है पूरा घटनाक्रम?
इंटरनेट पर वायरल हो रहा 36 सेकंड का वीडियो दतिया के बेरछा गांव का बताया जा रहा है। वीडियो में विधायक प्रदीप अग्रवाल पूरी श्रद्धा के साथ बाबा को माला पहनाने के लिए व्यास गद्दी के पास पहुंचते हैं। जैसे ही विधायक झुकते हैं, बाबा जोर-जोर से चिल्लाते हुए उन्हें खरी-खोटी सुनाने लगते हैं। इसी बीच बाबा ने विधायक की पीठ पर मुक्के मारे और माला उतारकर उनके चेहरे की ओर फेंक दी। विधायक ने इस पर कोई आपत्ति नहीं जताई और क्षमा याचना करते रहे।
सोशल मीडिया पर छिड़ी नई बहस
सोशल मीडिया पर इस वीडियो के वायरल होने के बाद लोग दो गुटों में बंट गए हैं। एक वर्ग इसे संत और उनके शिष्य के बीच का आध्यात्मिक प्रेम और निजी मामला बता रहा है। उनका कहना है कि बाबा का यह अंदाज वर्षों पुराना है और श्रद्धालु इसे सहज भाव से स्वीकार करते हैं। वहीं, दूसरा पक्ष सार्वजनिक मंच पर एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि के साथ इस तरह के शारीरिक दुर्व्यवहार को अनुचित और अमर्यादित करार दे रहा है। फिलहाल इस मामले में कोई शिकायत दर्ज नहीं हुई है।
