Himachal News: हिमाचल प्रदेश के किसानों और बागवानों के लिए एक बहुत ही बुरी खबर सामने आ रही है। राजकोष विभाग की सुस्ती के कारण प्रदेश के सैकड़ों बागवानों की करीब 10 करोड़ रुपये की अनुदान राशि लैप्स हो गई है। बागवानी विभाग ने बिल छह महीने पहले ही भेज दिए थे, लेकिन राजकोष विभाग उन पर कुंडली मारकर बैठा रहा। वित्त वर्ष 2025-26 समाप्त होने के कारण अब यह बड़ी रकम तकनीकी रूप से फंस गई है। इससे छोटे और सीमांत किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
राजकोष विभाग के सुस्त रवैये से किसान परेशान
राज्य सरकार की अधिकांश बागवानी योजनाएं सीधे राजकोष विभाग के भुगतान पर आधारित होती हैं। किसान कृषि उपकरण खरीदकर विभाग को बिल जमा करते हैं, जिसके बाद पैसा सीधे उनके बैंक खाते में आता है। बागवानी विभाग ने अपनी सभी औपचारिकताओं को समय पर पूरा कर लिया था। इसके बावजूद राजकोष विभाग ने वित्त वर्ष के अंत तक भुगतान की प्रक्रिया पूरी नहीं की। इस देरी ने अब प्रदेश भर के सैकड़ों मेहनती किसानों के करोड़ों रुपये अधर में लटका दिए हैं।
ऊना जिले के 67 किसानों के फंसे लाखों रुपये
अकेले जिला ऊना की बात करें तो यहां के 67 किसानों की 23 लाख रुपये की अनुदान राशि अटक गई है। किसानों ने बागवानी योजनाओं के तहत कर्ज लेकर सिंचाई व्यवस्था और आधुनिक मशीनरी तैयार की थी। अब समय पर पैसा न मिलने से उन्हें बैंक के ऋण और ब्याज की चिंता सता रही है। किसानों का कहना है कि यदि सब्सिडी मिलने में इसी तरह महीनों का इंतजार करना पड़ा, तो भविष्य में कोई भी सरकारी योजनाओं में रुचि नहीं दिखाएगा।
हिमाचल किसान यूनियन ने सरकार पर साधा निशाना
हिमाचल किसान यूनियन (सीटू) के जिला सचिव गुरनाम ने इस स्थिति पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि किसानों को अपनी ही हक की राशि के लिए एड़ियां रगड़नी पड़ रही हैं। कई बागवानों ने नई पौध लगाने के लिए साहूकारों और बैंकों से मोटा कर्ज उठा रखा है। सरकार के पास बजट होने के बावजूद भुगतान न करना प्रशासनिक विफलता को दर्शाता है। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही समाधान नहीं हुआ, तो वे उग्र आंदोलन करेंगे।
बागवानी विभाग ने दिया समाधान का आश्वासन
इस पूरे विवाद पर बागवानी विभाग के निदेशक डॉ. सतीश शर्मा ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विभाग की ओर से कोई भी कोताही नहीं बरती गई थी। सभी पात्र किसानों के बिल समय रहते राजकोष विभाग को भेज दिए गए थे। अब नया वित्त वर्ष शुरू हो चुका है, इसलिए विभाग रुकी हुई राशि को फिर से जारी करवाने का प्रयास कर रहा है। विभाग का दावा है कि वह शासन स्तर पर इस मुद्दे को सुलझाने के लिए लगातार बातचीत कर रहा है।
