पाषाण युग में लौटा पाकिस्तान: अंधेरे में डूबे लाहौर और कराची, क्या कंगाली के बीच खत्म हो जाएगी बिजली?

Pakistan News: पाकिस्तान इस समय अपने इतिहास के सबसे भीषण ऊर्जा संकट का सामना कर रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के कारण ईंधन की सप्लाई ठप हो गई है। इसका सीधा असर आम जनता की रसोई से लेकर बड़े उद्योगों तक पर पड़ा है। देश की आर्थिक हालत पहले से ही खस्ता थी, लेकिन अब बिजली और गैस की किल्लत ने इसे पूरी तरह झकझोर दिया है। लोग बुनियादी जरूरतों के लिए तरस रहे हैं और पूरे मुल्क में हाहाकार मचा हुआ है।

अंधेरे में डूबे बड़े शहर और थमी जिंदगी

लाहौर और कराची जैसे महानगरों में बिजली अब एक सपना बनती जा रही है। भीषण गर्मी के बीच लोगों को आधे दिन से ज्यादा बिना बिजली के रहना पड़ रहा है। सुबह काम पर जाते समय और शाम को घर लौटने पर सिर्फ अंधेरा ही मिलता है। ऊर्जा मंत्रालय के दावे जमीनी हकीकत से कोसों दूर नजर आ रहे हैं। मोबाइल टावर बंद हो रहे हैं और इंटरनेट सेवाएं ठप होने के कगार पर हैं। जनता का कहना है कि सरकार उन्हें आधुनिक युग से सीधे पाषाण युग में ले आई है।

LNG की कमी ने बढ़ाई सरकार की मुश्किलें

पाकिस्तान अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर कतर से एलएनजी (LNG) आयात करता है। लेकिन फारस की खाड़ी में जारी तनाव और गैस प्लांटों पर हमलों ने इस सप्लाई चेन को तोड़ दिया है। विदेशी मुद्रा भंडार की कमी के कारण सरकार महंगा ईंधन खरीदने की स्थिति में नहीं है। ऊर्जा मंत्री अवैस लेघारी ने स्वीकार किया है कि ईंधन की हर कमी लोड शेडिंग को और बढ़ा रही है। देश का पूरा ऊर्जा मॉडल अब ताश के पत्तों की तरह ढहता हुआ दिख रहा है।

उद्य़ोगों पर ‘मौत की घंटी’ और आर्थिक नुकसान

पाकिस्तान चैंबर्स ऑफ कॉमर्स ने चेतावनी दी है कि बिजली कटौती उद्योगों के लिए ‘मौत की घंटी’ साबित हो रही है। फैक्ट्रियों में रोजाना आठ घंटे से ज्यादा काम बंद रहता है, जिससे उत्पादन शून्य हो गया है। छोटे कारोबारी और दिहाड़ी मजदूर दाने-दाने को मोहताज हो रहे हैं। निर्यात गिरने से देश की अर्थव्यवस्था को अरबों का नुकसान हो रहा है। बिजली के साथ-साथ गैस की चोरी और कालाबाजारी भी चरम पर पहुंच गई है, जिससे कानून-व्यवस्था बिगड़ने का खतरा पैदा हो गया है।

खेल और कारोबार पर संकट के बादल

ऊर्जा संकट ने पाकिस्तान के मनोरंजन और खेल जगत को भी नहीं बख्शा है। पाकिस्तान सुपर लीग (PSL) जैसे बड़े टूर्नामेंट की चमक फीकी पड़ गई है। स्टेडियमों में दर्शकों की संख्या 40 फीसदी तक गिर गई है क्योंकि लोग घरों से बाहर निकलने से कतरा रहे हैं। सरकार ने दुकानों और रेस्तरां को जल्दी बंद करने के सख्त आदेश दिए हैं। बाजार खाली पड़े हैं और व्यापारियों का मुनाफा खत्म हो चुका है। ऐसा लग रहा है जैसे देश में फिर से लॉकडाउन लग गया हो।

राजनयिक कोशिशें और जमीनी नाकामी

पाकिस्तान ने खुद को ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थ के तौर पर पेश किया था। उसने सऊदी अरब और चीन के साथ मिलकर तनाव कम करने की कोशिश भी की। हालांकि, ये कूटनीतिक प्रयास देश के अंदर चल रहे ऊर्जा संकट को सुलझाने में नाकाम रहे। आंतरिक मोर्चे पर सरकार पूरी तरह विफल नजर आ रही है। जब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल और गैस की सप्लाई बहाल नहीं होती, पाकिस्तान की जनता को इस नारकीय जीवन से राहत मिलने की कोई उम्मीद नहीं दिख रही है।

SOURCE: न्यूज एजेंसी
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