Iran News: पश्चिम एशिया में जारी भीषण तनाव के बीच ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने परमाणु कार्यक्रम को लेकर बेहद कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने वाशिंगटन को सीधी चेतावनी देते हुए परमाणु तकनीक को ईरान का बुनियादी और कानूनी संप्रभु अधिकार घोषित कर दिया है। पिछले दो महीनों से जारी सैन्य संघर्ष और खाड़ी में फैलती युद्ध की लपटों के बीच यह बयान कूटनीतिक रास्तों को बंद कर सकता है। राष्ट्रपति पेजेशकियान ने अंतरराष्ट्रीय कानूनों पर सवाल उठाते हुए स्पष्ट किया कि ईरान अब किसी भी बाहरी दबाव के आगे झुकने को तैयार नहीं है।
परमाणु तकनीक पर ईरान का अडिग रुख
ईरानी राष्ट्रपति ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि परमाणु ऊर्जा का विकास उनकी वैज्ञानिक प्रगति का हिस्सा है। उन्होंने इसे ईरान का संप्रभु अधिकार बताते हुए अमेरिका की दखलअंदाजी को अवैध करार दिया है। पेजेशकियान का मानना है कि कोई भी बाहरी शक्ति ईरान की तकनीकी दिशा तय करने का अधिकार नहीं रखती। इस आक्रामक तेवर से संकेत मिल रहे हैं कि ईरान अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों की परवाह किए बिना अपने कार्यक्रम को गति देगा। विशेषज्ञों के अनुसार, यह अडिग रवैया परमाणु वार्ता को पटरी से उतार सकता है और संघर्ष को और अधिक हिंसक बना सकता है।
डोनाल्ड ट्रंप की सख्त चेतावनी और अमेरिकी रणनीति
ईरान के कड़े रुख के जवाब में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी दबाव और ज्यादा बढ़ा दिया है। ट्रंप ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को वैश्विक सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया है। हालांकि उन्होंने पूर्व में हुई चर्चाओं को सकारात्मक कहा था, लेकिन हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर उनके संकेत काफी आक्रामक हैं। अमेरिका का स्पष्ट मानना है कि ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार बनाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। दोनों महाशक्तियों के बीच यह वैचारिक और सैन्य टकराव अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी और आर्थिक संकट
युद्ध के इस माहौल में ईरान ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हॉर्मुज जलडमरूमध्य की फिर से नाकेबंदी कर दी है। यह समुद्री रास्ता वैश्विक तेल व्यापार के लिए जीवन रेखा माना जाता है। ईरान की इस कार्रवाई ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में खलबली मचा दी है और तेल की कीमतों में भारी उछाल की आशंका बढ़ गई है। ईरान इस रास्ते पर टोल लगाने या इसे पूरी तरह बंद करने की रणनीति अपना रहा है। इससे न केवल अमेरिका बल्कि पूरी दुनिया के लिए आर्थिक और सैन्य चुनौतियां पैदा हो गई हैं।
महायुद्ध की आहट और कूटनीतिक गतिरोध
सीजफायर की मियाद खत्म होने के करीब है और जमीनी हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं। सैन्य विशेषज्ञों का दावा है कि यदि इस्लामाबाद में होने वाली वार्ता बेनतीजा रही, तो यह तनाव महायुद्ध में बदल सकता है। ईरान का यह एलान कि वह अपने परमाणु अधिकारों से इंच भर भी पीछे नहीं हटेगा, सुलह की उम्मीदों को कमजोर कर रहा है। खाड़ी देशों में सैन्य गतिविधियां चरम पर हैं और दोनों पक्षों की सेनाएं हाई अलर्ट पर हैं। आने वाले कुछ दिन वैश्विक शांति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होने वाले हैं।
