मौत की बारूदी सुरंगें और समंदर का तूफान: नॉर्थ कोरिया से कैसे भागे एक परिवार के 9 लोग? रोंगटे खड़े कर देगी 10 साल की खौफनाक प्लानिंग

North Korea News: किम जोंग उन के शासन वाले उत्तर कोरिया से बाहर निकलना किसी मौत के कुएं से बाहर आने जैसा है। यहां की दीवारें भी लोगों पर नजर रखती हैं। लेकिन इन क्रूर पहरेदारियों को चकमा देकर किम इल-ह्योक और किम यी-ह्योक नामक दो भाइयों ने एक बड़ा दुस्साहसिक कदम उठाया। उन्होंने आजादी के लिए दस साल तक प्लानिंग की और बारूदी सुरंगों वाले रास्तों से गुजरकर अपने परिवार के साथ दक्षिण कोरिया में सुरक्षित पनाह ली।

पिता का सपना और 10 साल की गुप्त प्लानिंग

इस खतरनाक सफर की नींव दोनों भाइयों के पिता ने करीब एक दशक पहले रखी थी। उन्हें एहसास था कि इस क्रूर देश में बच्चों का कोई भविष्य नहीं है। पिता के सपने को साकार करने के लिए छोटे भाई किम यी-ह्योक ने सालों तक मछुआरे का काम सीखा। उन्होंने खुद की नाव खरीदी और गश्ती दल के अधिकारियों को रिश्वत देकर उनका विश्वास जीता। मछुआरे के वेश में वे अक्सर समुद्री सीमा के पास जाकर अभ्यास करते थे।

बारूदी सुरंगों पर रेंगना और बोरे में बंद बच्चे

छह मई को भयंकर तूफान ने पीले सागर को अपनी चपेट में ले लिया। खराब मौसम और धुंध का फायदा उठाकर परिवार ने भागने की योजना को अंजाम दिया। गश्ती दल से बचने के लिए महिलाओं को तटवर्ती इलाके से रेंगकर गुजरना पड़ा, जहां बारूदी सुरंगें बिछी थीं। चार और छह साल के छोटे बच्चों को अनाज की बोरियों में बंद कर दिया गया। ऐसा इसलिए किया गया ताकि उनकी आवाज किसी को भी सुनाई न दे सके।

साउथ कोरियन टीवी शो ने दिखाई आजादी की राह

यह परिवार उत्तर कोरिया के मानकों के हिसाब से काफी संपन्न था। वे चीन से तस्करी करके लाए गए टीवी पर छिपकर दक्षिण कोरियाई कार्यक्रम देखते थे। इन शो ने उन्हें एक नई दुनिया की तस्वीर दिखाई, जहां जिंदगी पूरी तरह आजाद थी। किम इल-ह्योक की पत्नी गर्भवती थीं और इस जानलेवा जोखिम से काफी डर रही थीं। अपने अजन्मे बच्चे के बेहतर भविष्य के लिए वह मौत के इस रास्ते पर चलने को पूरी तरह तैयार हो गईं।

समंदर के बीचों-बीच मिली आजादी लेकिन छिन गई खुशी

जब यह परिवार दक्षिण कोरिया की समुद्री सीमा में दाखिल हुआ, तो उनकी नाव को नौसेना ने रोका। जवानों ने पूछा कि क्या उनकी नाव का इंजन खराब है। भाइयों ने जवाब दिया कि वे आजादी की तलाश में आए उत्तर कोरियाई हैं। यह पल उनके लिए बड़े सपने के सच होने जैसा था। लेकिन जिस भाई ने दस साल तक योजना बनाई, दक्षिण कोरिया पहुंचने के महज उन्नीस महीने बाद एक हादसे में उसकी दर्दनाक मौत हो गई।

SOURCE: न्यूज एजेंसी
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