Himachal News: हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में दृष्टिहीन युवाओं का गुस्सा मंगलवार को भड़क उठा। अपनी मांगों को लेकर पिछले 918 दिनों से धरने पर बैठे इन युवाओं ने सचिवालय के पास जोरदार प्रदर्शन किया। उन्होंने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और चक्का जाम कर दिया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने अपनी शर्ट उतारकर रोष जताया। पुलिस और युवाओं के बीच हल्की धक्का-मुक्की भी हुई। इससे घंटों तक यातायात बाधित रहा और लोग जाम में फंसे रहे।
अधिकारियों से नहीं, अब सीधे मुख्यमंत्री से होगी बात
दृष्टिहीन जनसंगठन ने अब सरकार के खिलाफ बड़े आंदोलन की सख्त चेतावनी दी है। संगठन के सदस्यों ने साफ कर दिया है कि वे अब किसी अधिकारी से बात नहीं करेंगे। उनकी मांग है कि अब सीधे मुख्यमंत्री के साथ ही वार्ता होगी। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर मुख्यमंत्री ने उन्हें बातचीत के लिए नहीं बुलाया, तो वे ओकओवर का घेराव करेंगे। युवाओं ने इस दौरान अपनी जान देने तक की धमकी दे डाली है।
सड़कों पर पेट्रोल डालकर आत्मदाह की कड़ी चेतावनी
प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व कर रहे प्रवक्ता राजेश ठाकुर ने सरकार को कड़े शब्दों में चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि मांगें पूरी न होने पर युवा पेट्रोल डालकर आत्मदाह करेंगे। राजेश ठाकुर ने विशेष भर्ती अभियान चलाने की मांग प्रमुखता से उठाई है। उन्होंने कहा कि सरकार को खाली पड़े बैकलॉग पदों को एकमुश्त भरना चाहिए। सरकार लगातार उनकी जायज मांगों की अनदेखी कर रही है। इससे प्रदेश के करीब 1500 दिव्यांगों का भविष्य खतरे में पड़ गया है।
सरकार पर लगा वादाखिलाफी और अनदेखी का गंभीर आरोप
राजेश ठाकुर ने सरकार और प्रशासन पर वादाखिलाफी का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने बताया कि छह अप्रैल को भी युवाओं ने मुख्यमंत्री आवास ओकओवर तक मार्च किया था। तब उन्हें मुख्यमंत्री से बैठक करवाने का पक्का आश्वासन मिला था। इसके बाद सात अप्रैल को मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव से संपर्क करने की कोशिश की गई। लेकिन प्रशासन की तरफ से उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इससे युवाओं में सरकार के प्रति भारी निराशा और गुस्सा है।
छीन ली गई पुरानी सुविधाएं, सड़कों पर ठोकरें खाने को मजबूर
प्रवक्ता ने दुख जताते हुए कहा कि सरकार के पास दिव्यांगों का दर्द सुनने का बिल्कुल समय नहीं है। वे केवल संविधान से मिले अपने अधिकारों की मांग कर रहे हैं। इसके बावजूद सरकार उन्हें सड़कों पर धक्के खाने के लिए मजबूर कर रही है। हालात इतने खराब हैं कि उन्हें मिल रही पुरानी सुविधाएं भी छीन ली गई हैं। दृष्टिहीन युवा अब आर-पार की लड़ाई लड़ने के मूड में हैं। वे अपने हक के लिए डटे हुए हैं।
