Himachal News: पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार ने देश में लगातार बढ़ती आत्महत्या की घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि हर सुबह अखबार पढ़कर दिल दहल जाता है। देश में पिछले साल एक लाख सत्तासी हजार लोगों ने अपनी जान दे दी। इनमें तेरह हजार से अधिक छात्र शामिल थे। युवा पीढ़ी में तेजी से हताशा और निराशा फैल रही है। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह बेरोजगारी और गरीबी है। बढ़ती जनसंख्या इस स्थिति का कारण है।
छात्रों में बढ़ती आत्महत्या एक गंभीर चिंता
शांता कुमार ने कुरुक्षेत्र के एक शिक्षण संस्थान का दर्दनाक उदाहरण दिया। वहां महज दो महीने के भीतर चार छात्रों ने मौत को गले लगा लिया। देश भर में छात्र भारी दबाव और निराशा का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आत्महत्या के इन डरावने आंकड़ों के मूल कारण पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। सरकार और समाज को इस गंभीर खतरे को समझना होगा। युवाओं को बेहतर माहौल देने की सख्त जरूरत है। युवा हमारा भविष्य हैं।
बढ़ती जनसंख्या बेरोजगारी का मुख्य कारण
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देश की सबसे बड़ी समस्या बेतहाशा बढ़ती जनसंख्या है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने गरीबी दूर करने के लिए बेहतरीन योजनाएं बनाई हैं। इन योजनाओं का लोगों को बड़ा लाभ भी मिला है। सरकार ने काफी रोजगार भी दिए हैं। लेकिन जनसंख्या विस्फोट के कारण नए बेरोजगार लगातार पैदा हो रहे हैं। सारी सरकारी कोशिशें इस बढ़ती आबादी के सामने छोटी पड़ जाती हैं। आबादी नियंत्रण बिना रोजगार देना पूरी तरह असंभव है।
आबादी नियंत्रण से ही आएगी असल खुशहाली
दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले देश चीन ने भी बढ़ती जनसंख्या पर रोक लगाई। आज भारत चीन को पीछे छोड़कर आबादी में पहले स्थान पर आ गया है। शांता कुमार ने कहा कि यदि भारत की आबादी सौ करोड़ पर रुक जाती, तो आज स्थिति अलग होती। आज देश में चवालीस करोड़ लोग कम होते और हर तरफ खुशहाली होती। भयंकर महंगाई और बेरोजगारी का यह डरावना दौर हमें नहीं देखना पड़ता। देश का विकास तभी संभव है।
अमीरी और गरीबी के बीच बढ़ती भयानक खाई
शांता कुमार ने एक कड़वी सच्चाई सामने रखी। आज दुनिया के सबसे अमीर पांच देशों में भारत शामिल है। लेकिन विश्व के सबसे ज्यादा गरीब लोग भी भारत में ही रहते हैं। देश में भारी आर्थिक विकास जरूर हुआ है, पर बड़ी आर्थिक विषमता भी तेजी से पनपी है। हम एक ऐसा अमीर देश बन गए हैं, जहां गरीबों की तादाद बहुत ज्यादा है। विकास के साथ बढ़ती यह भयानक असमानता हमारे समाज के लिए बड़ा खतरा बन रही है।
