मल्लिकार्जुन खरगे के ‘आतंकवादी’ वाले बयान पर मचा बवाल, भाजपा ने बोला कांग्रेस पर तीखा हमला

Mallikarjun Kharge: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के एक विवादित बयान ने देश की राजनीति में भूचाल ला दिया है। तमिलनाडु में चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लिए ‘आतंकवादी’ शब्द का इस्तेमाल किया। इस टिप्पणी के बाद भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। भाजपा ने इसे कांग्रेस की गिरती मानसिकता का परिचायक बताया है। हालांकि, विवाद बढ़ता देख खरगे ने अपने बयान पर सफाई भी पेश की है।

भाजपा ने कांग्रेस की भाषा पर उठाए गंभीर सवाल

भाजपा सांसद डॉ. संबित पात्रा ने इस मुद्दे पर कांग्रेस को जमकर घेरा है। पात्रा ने कहा कि यह बयान कोई इत्तेफाक नहीं बल्कि एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। उनके अनुसार, राहुल गांधी भी पिछले कुछ समय से प्रधानमंत्री के खिलाफ अमर्यादित भाषा का प्रयोग कर रहे हैं। भाजपा नेताओं का मानना है कि जब भी कांग्रेस ने प्रधानमंत्री का अपमान किया है, देश की जनता ने उन्हें चुनावों में कड़ा सबक सिखाया है।

अमित मालवीय और पीयूष गोयल का तीखा पलटवार

भाजपा के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने खरगे की आलोचना करते हुए कहा कि कांग्रेस सार्थक बहस करने के बजाय निजी हमलों पर उतर आई है। उन्होंने कहा कि यह पहली बार नहीं है जब कांग्रेस अध्यक्ष ने सार्वजनिक विमर्श के स्तर को इतना नीचे गिराया है। वहीं, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि कांग्रेस और डीएमके का गठबंधन लोकतंत्र का अपमान कर रहा है। उन्होंने राहुल गांधी और एमके स्टालिन से देश की जनता से माफी मांगने की मांग की।

खरगे की सफाई और विवाद की असली जड़

विवाद गहराने के बाद मल्लिकार्जुन खरगे ने स्पष्ट किया कि उन्होंने प्रधानमंत्री को सीधे तौर पर आतंकवादी नहीं कहा था। उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि उनके कहने का तात्पर्य प्रधानमंत्री द्वारा लोकतांत्रिक संस्थाओं को डराने-धमकाने से था। यह पूरा घटनाक्रम 21 अप्रैल को तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के आखिरी दौर के प्रचार के दौरान हुआ। खरगे वहां एआईएडीएमके के एनडीए में शामिल होने की संभावनाओं पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे थे, तभी उन्होंने यह विवादास्पद टिप्पणी की।

लोकतांत्रिक मर्यादा और चुनावी माहौल पर असर

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव के समय इस तरह की बयानबाजी मतदाताओं के ध्रुवीकरण का कारण बन सकती है। भाजपा इस मुद्दे को जनता के बीच ले जाकर कांग्रेस को ‘राष्ट्रविरोधी’ और ‘अमर्यादित’ दल के रूप में पेश करने की कोशिश कर रही है। दूसरी ओर, कांग्रेस इसे भाजपा की डराने वाली राजनीति के खिलाफ एक कड़ा विरोध बता रही है। फिलहाल, इस जुबानी जंग ने आगामी चुनावी नतीजों को लेकर सस्पेंस और बढ़ा दिया है।

SOURCE: न्यूज एजेंसी
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