Delhi News: दिल्ली हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को एक बड़ा झटका दिया है। अदालत ने आबकारी नीति मामले में उनकी अहम याचिका को खारिज कर दिया है। केजरीवाल ने अपनी याचिका में जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा को इस केस से हटाने की मांग की थी। लेकिन जज ने खुद को मामले से अलग करने से इनकार कर दिया है। जस्टिस शर्मा ने स्पष्ट किया है कि वह शराब घोटाले की सुनवाई जारी रखेंगी। इस बड़े फैसले के बाद आम आदमी पार्टी ने काफी तीखी प्रतिक्रिया दी है।
सौरभ भारद्वाज ने फैसले पर उठाए कई गंभीर सवाल
आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता सौरभ भारद्वाज ने इस फैसले पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका पर पार्टी ने अपनी उचित आशंका जताई थी। भारद्वाज के अनुसार किसी जज से केस छोड़ने की अपील का मतलब उन पर पक्षपात का आरोप लगाना नहीं होता है। इसका सीधा मकसद केवल यह बताना होता है कि संबंधित पक्ष को न्याय न मिलने की गहरी आशंका है। अरविंद केजरीवाल ने अदालत के सामने ऐसी दस अहम वजहें रखी थीं।
जज को बिना कारण बदलने का दिया पुराना हवाला
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि आशंकाओं के बावजूद जज ने केस खुद सुनने का फैसला किया है। आप नेता ने साल दो हजार बाईस के एक पुराने मामले का खास तौर पर जिक्र किया। उन्होंने बताया कि तब निचली अदालत की एक जज ने जांच एजेंसी से सख्त सवाल पूछे थे। इसके तुरंत बाद केंद्र सरकार ने बिना किसी ठोस वजह के उस जज को बदलवा दिया था। भारद्वाज ने कहा कि केजरीवाल ने तो दस ठोस कारण दिए थे।
जज के परिवार को लेकर आप ने उठाए गंभीर सवाल
भारद्वाज ने जज के परिवार के सदस्यों को लेकर भी कई सवाल उठाए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि केजरीवाल ने किसी के वकील बनने का बिल्कुल विरोध नहीं किया है। असल समस्या यह है कि जज के वकील बच्चे केंद्र सरकार के सुप्रीम कोर्ट पैनल का हिस्सा हैं। ये वकील उन्हीं अधिकारियों के अधीन काम करते हैं जो इस केस से जुड़े हैं। इस पैनल में वकीलों की नियुक्ति बिना परीक्षा के सीधे सरकार की मर्जी से होती है।
अधिवक्ता बैठकों में जजों के जाने पर जताई आपत्ति
आप नेता ने अधिवक्ता बैठकों में जजों के शामिल होने पर आपत्ति दर्ज कराई है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों से जुड़ी ऐसी बैठकों में जाने से न्यायपालिका की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं। मालूम हो कि केजरीवाल ने इससे पहले हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को भी एक पत्र लिखा था। इसमें उन्होंने यह महत्वपूर्ण मामला किसी अन्य बेंच को सौंपने की गुजारिश की थी। मुख्य न्यायाधीश द्वारा मांग ठुकराने के बाद केजरीवाल सुप्रीम कोर्ट भी गए थे।
