Bihar News: बिहार के पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव एक बड़े विवाद में घिर गए हैं। उन्होंने राजनीति में महिलाओं की भूमिका को लेकर बेहद आपत्तिजनक बयान दिया है। इस बयान के बाद सियासी गलियारों में भारी बवाल मच गया है। बिहार राज्य महिला आयोग ने इस मामले पर स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने मंगलवार इक्कीस अप्रैल को सांसद को एक सख्त नोटिस भेजा है। इस नोटिस में उनसे तीन दिन के भीतर जवाब मांगा गया है।
पप्पू यादव ने महिलाओं पर क्या कहा?
निर्दलीय सांसद ने मीडिया से बातचीत करते हुए एक विवादित दावा किया था। उन्होंने कहा कि राजनीति में महिलाओं का सफर अक्सर प्रभावशाली लोगों के निजी दायरे से शुरू होता है। पप्पू यादव ने दावा किया कि नब्बे प्रतिशत महिलाओं का राजनीतिक करियर नेताओं के बिस्तरों से शुरू होता है। उनके अनुसार महिलाएं किसी बड़े नेता के कमरे में गए बिना राजनीति नहीं कर सकती हैं। उन्होंने सत्ता के गलियारों में महिलाओं के गहरे शोषण की बात कही है।
महिला आयोग ने लिया कड़ा संज्ञान
इस भड़काऊ बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इसके बाद बिहार राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष अप्सरा ने कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने पप्पू यादव को भेजे गए नोटिस में इसे घृणित बयान करार दिया है। आयोग का मानना है कि यह बयान राजनीति में काम कर रही महिलाओं के आत्मसम्मान और सामाजिक प्रतिष्ठा को गहरी ठेस पहुंचाता है। यह समाज में महिलाओं की छवि को खराब करने का एक प्रयास है।
क्या रद्द होगी सांसद की सदस्यता?
महिला आयोग ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया है। आयोग ने सांसद से पूछा है कि इस तरह का घृणित बयान क्यों दिया गया। आयोग ने चेतावनी दी है कि क्यों न उनकी लोकसभा सदस्यता रद्द करने की अनुशंसा की जाए। पप्पू यादव को अपना स्पष्ट जवाब पत्र प्राप्ति के तीन दिनों के अंदर सौंपना होगा। अगर समय पर संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो उनके खिलाफ लोकसभा अध्यक्ष से कड़ी कार्रवाई की मांग की जा सकती है।
