America News: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सुप्रीम कोर्ट से तगड़ा झटका लगा है। अदालत के आदेश के बाद अमेरिका में पंद्रह लाख करोड़ रुपये की टैरिफ रिफंड प्रक्रिया शुरू हो गई है। ट्रंप ने पिछले साल मनमाने ढंग से कई देशों पर भारी टैरिफ लगाए थे। सुप्रीम कोर्ट ने बीस फरवरी को इसे रद्द कर दिया था। इसके बाद अमेरिकी सरकार को वसूली गई रकम लौटानी पड़ रही है। बीस अप्रैल से रिफंड के लिए आवेदन शुरू हुए हैं।
भारतीय कंपनियों को कितना मिलेगा रिफंड?
व्यापारिक संगठन जीटीआरआई की रिपोर्ट के अनुसार कुल रिफंड में दस से बारह अरब डॉलर भारत से जुड़े हैं। यह पैसा भारतीय वस्तुओं पर वसूला गया था। रिफंड प्रक्रिया केप नाम के डिजिटल प्लेटफॉर्म से चल रही है। इसका संचालन अमेरिकी कस्टम विभाग कर रहा है। रिफंड की रकम में ब्याज भी शामिल रहेगा। स्वीकृत दावों का भुगतान साठ से नब्बे दिनों में होने की उम्मीद है। हालांकि भारतीय निर्यातकों के लिए रिफंड का सीधा लाभ उठाना आसान नहीं होगा।
निर्यातकों के लिए रिफंड पाना क्यों है मुश्किल?
भारतीय कंपनियों को सीधा फायदा मिलने में एक बड़ी कानूनी बाधा है। रिफंड की नई व्यवस्था केवल अमेरिकी आयातकों को दावा करने की अनुमति देती है। जिन अमेरिकी कंपनियों ने सीमा शुल्क का भुगतान किया है वही रिफंड ले सकती हैं। दावों के लिए आयातकों को शिपमेंट डेटा और भुगतान का प्रमाण देना होगा। निर्यातकों के पास धनराशि वापस पाने का कोई सीधा रास्ता नहीं है। कंपनियों को अपना हिस्सा पाने के लिए अमेरिकी खरीदारों से बातचीत करनी होगी।
किन प्रमुख भारतीय क्षेत्रों को हुआ था नुकसान?
जीटीआरआई के आंकड़ों के अनुसार भारत के कुल अमेरिकी निर्यात का तिरपन प्रतिशत हिस्सा टैरिफ से प्रभावित हुआ था। सबसे ज्यादा नुकसान कपड़ा और परिधान जैसे उद्योगों को उठाना पड़ा था। इन क्षेत्रों से भारत के रिफंड में लगभग चार अरब डॉलर का योगदान होने का अनुमान है। इंजीनियरिंग क्षेत्र से जुड़े सामान का योगदान भी करीब चार अरब डॉलर हो सकता है। इसके अलावा रसायन उद्योग का योगदान लगभग दो अरब डॉलर तक पहुंचने की पूरी संभावना है।
